
सोर्स- सोशल मीडिया
Health Insurance Premiums: पहले सरकार ने हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम पर लगने वाला जीएसटी हटाकर लोगों को राहत दी थी। अब सरकार का ध्यान लगातार बढ़ रहे हेल्थ इंश्योरेंस के प्रीमियम की तरफ गया है, जिससे आम आदमी की जेब पर ज्यादा बोझ पड़ रहा है। इस समस्या को देखते हुए, सरकार ने अब इस मामले में सीधा दखल देने का फैसला किया है। प्रीमियम की इस बेतहाशा बढ़ोतरी को रोकने के लिए सरकार ने बीमा रेगुलेटर (IRDAI), इंडस्ट्री के बड़े अधिकारियों और हॉस्पिटल ग्रुप्स के साथ बातचीत शुरू कर दी है।
हेल्थ इंश्योरेंस का प्रीमियम जिस तेजी से बढ़ रहा है, उससे आम जनता काफी परेशान है। इस प्रीमियम पर लगाम लगाने के लिए सरकार अब कई कड़े कदम उठाने पर विचार कर रही है।
प्रीमियम महंगा होने के पीछे की मुख्य वजह इलाज का तेजी से बढ़ता खर्च है। अस्पतालों में महंगी मशीनों और नई टेक्नॉलजी का इस्तेमाल बढ़ गया है। बीमा कंपनियों का यह भी आरोप है कि कई बार अस्पताल जरूरत से ज्यादा बिल बना देते हैं। इन सब कारणों से बीमा कंपनियों पर क्लेम का बोझ बढ़ता है और वे ग्राहकों से ज्यादा प्रीमियम वसूलती हैं।
दूसरी तरफ अस्पतालों का कहना है कि बीमा कंपनियां क्लेम देने में देरी करती हैं या फिर बिल में बिना वजह कटौती कर देती हैं। इस खींचतान में आम आदमी परेशान होता है, क्योंकि क्लेम के समय उन्हें उम्मीद से कम पैसा मिलता है या फिर सेटलमेंट में बहुत परेशानी होती है।
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एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में मेडिकल महंगाई 2026 में 11.5% तक बढ़ने का अनुमान है, जो कि वैश्विक औसत (9.8%) से काफी ज्यादा है। इसीलिए सरकार अब इस पर लगाम लगाने के लिए जल्द ही अंतिम फैसला ले सकती है।






