आंबिया बहार फल फसल बीमा योजना लागू, किसानों को मिलेगी फसल नुकसान में मदद

Washim Farmers: मौसम आधारित 'आंबिया बहार फल फसल बीमा योजना' लागू की गई है। योजना के अंतर्गत प्राकृतिक आपदा और प्रतिकूल मौसम के कारण फल फसलों को नुकसान होने पर किसानों को बीमा सुरक्षा प्रदान की जाएगी।
आंबिया बहार फल फसल बीमा योजना लागू
आंबिया बहार फल फसल बीमा योजना लागू (सौजन्यः सोशल मीडिया)
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Washim News: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत पुनर्निर्मित मौसम आधारित 'आंबिया बहार फल फसल बीमा योजना' लागू की गई है। इस योजना के अंतर्गत प्राकृतिक आपदा और प्रतिकूल मौसम के कारण फल फसलों को नुकसान होने पर किसानों को बीमा सुरक्षा प्रदान की जाएगी। किसानों से इस योजना का लाभ उठाने की अपील की गई है। यह योजना ऋणी और गैर-ऋणी दोनों प्रकार के किसानों के लिए अधिसूचित क्षेत्रों में अधिसूचित फसलों के लिए वैकल्पिक है।

भूमि मालिकों के अलावा किराए या बटाई पर खेती करने वाले किसान भी इस योजना में भाग लेने के पात्र हैं। जिन किसानों ने सरकारी, ग्रामीण, वाणिज्यिक या निजी बैंकों से अधिसूचित फसलों के लिए ऋण लिया है, उन्हें योजना में शामिल होने या न होने संबंधी घोषणा पत्र, अंतिम तिथि से 7 दिन पहले तक जमा करना आवश्यक है।

मौसम के लिए बीमा का आवेदन

गैर-ऋणी किसानों को इसके लिए 'आपले सरकार सेवा केंद्र' से संपर्क करना चाहिए। किसानों को बीमित राशि का केवल 5% प्रीमियम भरना होगा। योजना के अंतर्गत प्रति किसान को अधिकतम 4 हेक्टेयर क्षेत्र तक बीमा पंजीकरण की अनुमति दी गई है। अधिसूचित फसलों में से किसी एक फसल के एक ही मौसम के लिए बीमा का आवेदन किया जा सकता है।

योजना में बीमा प्रीमियम और संरक्षित राशि

केला: 1,70,000 बीमित राशि के लिए 28,500 प्रीमियम, संतराः 1,00,000 बीमित राशि के लिए 212,00 प्रीमियम, मोसंबी: 1,00,000 बीमित राशि के लिए 5,000 प्रीमियम, गारपीट/तेज हवा से सुरक्षा हेतु बीमा, संतरा व मोसंबी: 33,000 बीमित राशि, 28,250 प्रीमियम, केलाः 57,000 बीमित राशि, 14,250 प्रीमियम का समावेश है। आवेदन की अंतिम तिथि केला और मोसंबी के लिए 31 अक्टूबर 2025, संतरा के लिए 30 नवंबर 2025 है।

यदि ओले गिरने या तेज हवा जैसी मौसमीय घटनाओं से फसल को नुकसान होता है, तो किसानों को घटना के 72 घंटे के भीतर बीमा कंपनी, संबंधित मंडल कृषि अधिकारी को इसकी सूचना देना अनिवार्य है। इसके पश्चात, बीमा कंपनी जिला प्रशासन और कृषि विभाग की मदद से व्यक्तिगत स्तर पर नुकसान का मूल्यांकन करेगी। किसानों से इस योजना का लाभ उठाने की अपील की है।

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