

Zero Fat Health Side Effects: आजकल फिट दिखने की होड़ में जीरो-फैट का कॉन्सेप्ट तेजी से पॉपुलर हो रहा है। वजन घटाने की जंग में लोगों ने घी और तेल को अपनी डाइट से पूरी तरह बाहर कर दिया है। लेकिन आयुर्वेद और विज्ञान दोनों चेतावनी देते हैं कि फैट-फ्री लाइफस्टाइल सेहत नहीं बल्कि बीमारियों का घर है।
आज की सुस्त जीवनशैली में खुद को फिट रखने के लिए लोग अक्सर शॉर्टकट अपनाते हैं। इसी का नतीजा है दुनियाभर में फैला जीरो-फैट का भ्रम। लोग अनजाने में तेल और घी को अपना दुश्मन मान बैठे हैं जबकि हकीकत यह है कि स्वस्थ वसा के बिना मानव शरीर का सुचारू रूप से चलना असंभव है।
बाजार में मिलने वाले लो-फैट और जीरो-फैट प्रोडक्ट्स को स्वास्थ्य के नाम पर बेचा जा रहा है लेकिन इनका अधिक सेवन मस्तिष्क और कोशिकाओं पर बुरा असर डालता है। आयुर्वेद के अनुसार शरीर को सुचारू रूप से चलाने के लिए चिकनाई का एक सीमित स्तर होना अनिवार्य है। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि हम बैड फैट (पिज्जा, समोसे, प्रोसेस्ड फूड) की नहीं बल्कि गुड फैट की बात कर रहे हैं।
खुद को स्वस्थ रखने के लिए देशी घी, कच्ची घानी का तेल (सरसों, नारियल या तिल), अखरोट, बादाम, अलसी के बीज, एवोकाडो और जैतून के तेल को सीमित मात्रा में लें। यह वसा आपकी कोशिकाओं को नया जीवन देती है और शरीर को अंदरूनी रूप से मजबूत बनाती है।