महाराष्ट्र जैसा पेच बिहार में फंसा, गृह कलेश बदलेगा कहानी; दशकों पुराना मोह नीतीश के लिए आसान नहीं

Bihar में चुनाव नतीजे आ गए और Nitish Kumar मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठ गए, लेकिन असली खेल अभी बाकी है। सरकार बनने के बाद भी एक पेंच ऐसा फंसा है जिसने पटना से लेकर Delhi तक माथापच्ची बढ़ा दी है।
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बिहार में फिर 'गृह' कलह बन सकती है खतरनाक (कॉन्सेप्ट फोटो- सोशल मीडिया)
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Bihar Home Ministry BJP-JDU Tussle: बिहार में चुनाव नतीजे आ गए और नीतीश कुमार मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठ गए, लेकिन असली खेल अभी बाकी है। सरकार बनने के बाद भी एक पेंच ऐसा फंसा है जिसने पटना से लेकर दिल्ली तक माथापच्ची बढ़ा दी है। मामला उस गृह विभाग का है जिसे नीतीश कुमार ने 2005 से अपने सीने से लगाकर रखा है। अब भाजपा चाहती है कि यह विभाग उसे मिले। क्या नीतीश दशकों पुराना यह मोह छोड़ पाएंगे या महाराष्ट्र की तरह यहां भी खींचतान लंबी चलेगी?

भाजपा ने इस बार बड़ा दिल दिखाते हुए मुख्यमंत्री पद पर नीतीश कुमार का समर्थन किया है, लेकिन बदले में वह भी कुछ ठोस चाहती है। चर्चा है कि स्पीकर का पद भाजपा के पास रहेगा और डिप्टी स्पीकर जेडीयू का होगा। बाकी मंत्रालयों पर तो लगभग सहमति बन गई है, लेकिन गृह मंत्रालय पर गाड़ी अटक गई है। भाजपा चाहती है कि जब सीएम नीतीश हैं, तो गृह विभाग का जिम्मा उसके किसी नेता, संभवतः सम्राट चौधरी या किसी और कद्दावर नेता के पास हो।

सम्राट के हाथ कमान और विवादों का तूफान

भाजपा के पास सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा जैसे विकल्प हैं। अगर वरिष्ठता देखें तो सम्राट चौधरी का दावा मजबूत है। लेकिन यहां पेंच यह है कि प्रशांत किशोर ने सम्राट चौधरी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने हत्या के पुराने मामले, शिल्पी जैन केस और दस्तावेजों में जन्मतिथि की गड़बड़ी का जिक्र किया है। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर जिस नेता पर सवाल हैं, वही पुलिस और कानून व्यवस्था का मुखिया बन जाए, तो सरकार की छवि का क्या होगा? यह स्थिति वैसी ही होगी जैसे यूपी में कभी राजा भैया को जेल मंत्री बनाने पर सवाल उठे थे। नीतीश कुमार के लिए ऐसे नेता को गृह विभाग सौंपना सहज नहीं होगा, भले ही वे गठबंधन धर्म निभा रहे हों।

दिल्ली दरबार में सुलझेगी गुत्थी?

इस मुद्दे को सुलझाने के लिए दिल्ली में अमित शाह के साथ ललन सिंह और संजय झा की लंबी बैठक हुई, पर अंतिम फैसला पटना में अमित शाह की मौजूदगी में ही होना तय हुआ। पटना में सम्राट चौधरी ने भी विभागों की सूची लेकर नीतीश कुमार से मुलाकात की है। स्थिति कमोबेश महाराष्ट्र जैसी है, जहां एकनाथ शिंदे ने सीएम रहते गृह विभाग मांगा था, क्योंकि पहले डिप्टी सीएम रहते फडणवीस के पास यह विभाग था। लेकिन भाजपा ने वहां अपनी बात मनवाई। बिहार में परंपरा रही है कि पीएम या सीएम ही गृह विभाग रखते हैं, केवल इंद्रजीत गुप्ता जैसे अपवाद रहे हैं। अब देखना है कि अमित शाह इस 'गृह कलेश' को कैसे शांत करते हैं।

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