

AIMIM Protests On Encroachment Notices In Aurangabad: महानगरपालिका द्वारा मुस्लिम नुमाइंदा काउंसिल के चार पदाधिकारियों को जारी अतिक्रमण संबंधी नोटिसों ने शहर की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। AIMIM और मुस्लिम नुमाइंदा काउंसिल ने आरोप लगाया है कि प्रशासन ने तथ्यों की पुष्टि किए बिना केवल गुमनाम ऑनलाइन शिकायतों के आधार पर कार्रवाई की है।
इस मुद्दे को लेकर दोनों संगठनों के प्रतिनिधिमंडल ने मनपा आयुक्त अमोल येडगे से मुलाकात कर नोटिस तत्काल निरस्त करने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।
बुधवार को AIMIM के शहर अध्यक्ष नासेर सिद्दीकी, विपक्ष के नेता समीर बिल्डर, नगरसेवक सैयद उसामा तथा मुस्लिम नुमाइंदा काउंसिल के पदाधिकारियों ने आयुक्त से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि मोहम्मद मेहराजुद्दीन सिद्दीकी, मौलाना नुमान नदवी, अब्दुल मोईद हशर और शोएब सिद्दीकी को तीन दिनों के भीतर संपत्ति से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए नोटिस जारी किए गए हैं। उनका कहना है कि कार्रवाई से पहले न तो शिकायत की सत्यता की जांच की गई और न ही संबंधित व्यक्तियों का पक्ष जानने का प्रयास किया गया।
प्रतिनिधिमंडल का दावा है कि जिन चार लोगों को नोटिस भेजे गए हैं, उनमें से तीन संबंधित संपत्तियों के स्वामी ही नहीं हैं। ऐसे में बिना प्राथमिक सत्यापन के नोटिस जारी करना प्रशासनिक प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उनका कहना है कि किसी भी कार्रवाई से पहले राजस्व अभिलेखों और स्वामित्व की जांच करना आवश्यक था।
इसी दौरान AIMIM के शहर अध्यक्ष नासेर सिद्दीकी ने आरोप लगाया कि शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में उनके संगठन के सदस्यों को चुनकर निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बिना किसी प्रारंभिक जांच के नोटिस जारी करना संदेह पैदा करता है। यदि महानगरपालिका इस प्रकार की दबाव की राजनीति करेगी, तो उसका लोकतांत्रिक तरीके से जवाब दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन को किसी भी कार्रवाई से पहले निष्पक्ष और पारदर्शी जांच करनी चाहिए।
प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों की भावना का पालन किए बिना सीधे नोटिस जारी किए जा रहे हैं। उनका कहना है कि चुनिंदा लोगों के खिलाफ कार्रवाई कर शहर में 'बुलडोजर संस्कृति' लागू करने का प्रयास किया जा रहा है। संगठन ने मांग की कि पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराई जाए और जांच पूरी होने तक संबंधित नोटिसों पर अमल रोका जाए।
AIMIM और मुस्लिम नुमाइंदा काउंसिल ने महानगरपालिका आयुक्त अमोल येडगे से आग्रह किया कि जारी किए गए नोटिस तत्काल वापस लिए जाएं तथा भविष्य में किसी भी शिकायत पर कार्रवाई से पहले तथ्यात्मक जांच सुनिश्चित की जाए। प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि प्रशासन की कार्रवाई कानून सम्मत, पारदर्शी और सभी नागरिकों के प्रति समान होनी चाहिए, ताकि किसी भी निर्दोष व्यक्ति को अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े।
– नवभारत लाइव के लिए छत्रपति संभाजीनगर से शफीउल्ला हुसैनी की रिपोर्ट