
महिला वोटरों NDA की जीत की पक्की (सोर्स- सोशल मीडिया)
Bihar Election Result 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजे आने ही वाले हैं, और इससे राज्य की राजनीति की पूरी तस्वीर साफ होने की उम्मीद है। शुरुआती रुझानों में एनडीए को बहुमत के साथ एक बड़ी जीत मिलती दिखाई दे रही है। लोकसभा चुनाव की तरह इस बार भी बिहार की जनता महागठबंधन के पक्ष में खड़ी नजर नहीं आ रही है।
इस चुनाव में मतदान ने 63 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया। राज्य में 67 प्रतिशत मतदाताओं ने मतदान केंद्रों पर पहुंचकर अपनी सरकार चुनने की प्रक्रिया में हिस्सा लिया। इसे स्वतंत्र भारत के इतिहास का सबसे बड़ा जनमत कहना गलत नहीं होगा। सबसे खास बात यह रही कि महिलाओं ने मतदान के मामले में नया इतिहास रच दिया। कुल महिला मतदाता सहभागिता 71 प्रतिशत रही, जो पुरुषों के मुकाबले लगभग 10 प्रतिशत ज्यादा है।
बिहार में महिलाओं की इस बढ़ी हुई भागीदारी ने बढ़ियां तो हैं नीतीश कुमार वाले नारे को भी सार्थक किया है। नीतीश कुमार के लगभग 20 साल के कार्यकाल में महिला सशक्तिकरण पर लगातार जोर दिया गया और कई कल्याणकारी योजनाएँ चलाई गईं। चुनाव की घोषणा से ठीक पहले सितंबर में मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना शुरू की गई, जिसके तहत राज्य भर की महिलाओं को 10,000 रुपये की सहायता राशि दी गई।
इसके साथ ही बिहार देश का पहला प्रदेश है जहां पंचायती राज व्यवस्था में महिलाओं को पहली बार आरक्षण मिल पाया और उनकी बेहतर भागीदारी सुनिश्चित की जा सकी। इसके साथ ही बिहार में 2016 के बाद से जारी शराबबंदी ने प्रदेश की महिला मतदाताओं के दिल में नीतीश सरकार के प्रति एक अलग स्थान बना दिया है। बिहार में महिलाएं जीवनयापन के लिए थोड़ा कष्ट सहने को तैयार हैं लेकिन शराब की वजह से घर की कलह और टूटते परिवार को देख पाना उनके लिए नामुमकिन है। ऐसे में नीतीश सरकार पर महिलाओं का भरोसा चुनाव दर चुनाव बढ़ता गया।
बिहार में महिलाओं के लिए नीतीश सरकार की सोच एक बार देखिए छात्रवृत्ति, आरक्षण, छात्राओं के लिए साइकिल और पोशाक योजना, स्वयं सहायता समूहों के जरिए रोजगार, उद्योग के लिए सहायता राशि और हाल ही में महिलाओं को सीधे बैंक खाते में 10 हजार रुपए की आर्थिक सहायता राशि। बिहार में सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 33 फीसदी और पंचायती राज में 50 आरक्षण का प्रावधान, जिसकी वजह से प्रदेश में पुरुषों की तुलना में महिलाएं पहले से अधिक आत्मनिर्भर और जागरूक हुई हैं। इस बार तो मतदान के दौरान बिहार में महिलाओं में पुरुषों के मुकाबले राजनीतिक चेतना ज्यादा बेहतर नजर आई। इस बार महिलाओं ने किसी के कहने पर नहीं बल्कि अपने निर्णय से वोट किया।
एक और बात पर गौर कीजिए बिहार देश का पहला राज्य है जहां 31 लाख से अधिक जीविका दीदियां हैं जो लखपति हैं। इन जीविका दीदियों को लखपति बनाने की योजना नीतीश सरकार में 2023 में शुरू हुई थी। जब 2020 में उनकी कमाई इससे कहीं कम थी तब भी उन्होंने नीतीश कुमार का समर्थन किया। अब जब 31 लाख से अधिक लखपति दीदियां हो गई हैं तो जाहिर उन्होंने 2025 में अधिक मजबूती से नीतीश कुमार का समर्थन किया होगा। ऐसा में यह साफ हो गया कि महिला वोटरों के उत्साह ने सत्ता विरोधी लहर को काट कर नतीजों की दिशा नीतीश कुमार की तरफ मोड़ दी।
इस चुनाव में बिहार से एक ऐसा आंकड़ा सामने आया जो हैरान करने वाला था। दरअसल, बिहार में एसआईआर के बाद पुरुष मतदाताओं की तुलना में महिला मतदाताओं का पंजीकृत आधार छोटा दिखा लेकिन इसके बावजूद कुल मतदान में महिलाओं की हिस्सेदारी पुरुषों से कहीं ज्यादा होना चौंकाने के लिए काफी था।
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ऐसे में बिहार की राजनीति की समझ रखने वाले लोगों की मानें तो इस विधानसभा चुनाव में महिलाओं ने सिर्फ मतदान का आंकड़ा नहीं बढ़ाया, बल्कि चुनाव के नतीजों की दिशा तय करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह बदलाव बिहार की राजनीति में निर्णायक साबित हुई, क्योंकि महिला मतदाताओं ने हर दल के चुनावी समीकरण को प्रभावित किया।
एजेंसी इनपुट के साथ-






