ढाका विधानसभा: भारत-नेपाल सीमा पर राजनीति, 2025 में भाजपा-राजद की टक्कर, सुरक्षा और विकास की परीक्षा

Bihar Assembly Elections: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में पूर्वी चंपारण की ढाका सीट पर भाजपा और राजद के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिल रही है। भारत-नेपाल सीमा से जुड़े मसले, पलायन, बाढ़ नियंत्रण और...
Dhaka Assembly: Politics on the India-Nepal border, BJP-RJD contest in 2025, test of security and development
ढाका विधानसभा, (कॉन्सेप्ट फोटो)
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Dhaka Assembly Constituency: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की बढ़ती सरगर्मियों के बीच, पूर्वी चंपारण जिले की ढाका विधानसभा सीट एक बार फिर से राजनीतिक हलचल का केंद्र बनी हुई है।

शिवहर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली यह सामान्य वर्ग की सीट बिहार पॉलिटिक्स में हमेशा से ही महत्वपूर्ण रही है, विशेषकर अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण। ढाका उत्तर बिहार का एक व्यस्त कस्बा है, जो सीधे भारत-नेपाल सीमा से सटा हुआ है। सिकरहना अनुमंडल का मुख्यालय होने के नाते यह स्थानीय व्यापार का एक महत्वपूर्ण केंद्र है।

भौगोलिक महत्व और अर्थव्यवस्था

जिला मुख्यालय मोतिहारी से 28 किमी उत्तर-पूर्व में स्थित ढाका, मेहसी, बैरगनिया और सुगौली जैसे महत्वपूर्ण स्थानों से सड़क मार्ग द्वारा जुड़ा हुआ है। रक्सौल (28 किमी उत्तर-पश्चिम) यहां का प्रमुख व्यापारिक केंद्र है, जो नेपाल के गौर, चंद्रनिगहापुर और बीरगंज से सीधा संपर्क प्रदान करता है। ढाका की यह सीमा निकटता जहां व्यापार के अवसर पैदा करती है, वहीं तस्करी और अवैध प्रवेश जैसी चुनौतियां भी खड़ी करती है, जो चुनाव में एक सीमा सुरक्षा के रूप में बड़ा मुद्दा बनता है। ढाका की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि प्रधान है, जिसमें धान, मक्का और गन्ना प्रमुख फसलें हैं। बाजारों में स्थानीय उत्पादों के साथ-साथ ब्रांडेड सामान भी उपलब्ध हैं, लेकिन यहां की अर्थव्यवस्था की रीढ़ रेमिटेंस (Remittance) है। शिक्षा और रोजगार के अवसरों की कमी के कारण, युवाओं का दिल्ली, पंजाब और महाराष्ट्र जैसे बड़े शहरों और राज्यों में पलायन एक आम समस्या है, जिस पर हर Bihar Assembly Election 2025 में नेता वादे करते हैं।

चुनावी इतिहास: कांग्रेस से भाजपा-राजद की वर्चस्व की लड़ाई

ढाका विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास काफी विविध रहा है। शुरुआती दौर में कांग्रेस का दबदबा रहा। पार्टी ने 1952 से 1985 तक हुए 9 में से 6 चुनावों में जीत दर्ज की, जिसमें मसूदुर रहमान और मोतिउर रहमान जैसे नेता प्रमुख थे। हालांकि, बाद में यह सीट मुख्य रूप से भाजपा और राजद (RJD) के बीच सत्ता की अदला-बदली का अखाड़ा बन गई।

भाजपा का प्रभुत्व: भाजपा के अवनीश कुमार सिंह ने 1990 से 2005 के बीच चार बार जीत दर्ज कर सीट पर मजबूत पकड़ बनाई। जिससे भाजपा अपने आप को मजबूत मानती है।

राजद को मिलती रही चुनौती: राजद के मनोज कुमार सिंह ने 2000 में सफलता पाई। तब से पार्टी को जीत के लिए इंतजार करना पड़ रहा है।

हाल के वर्षों का चुनावी संघर्ष: 2010 में निर्दलीय पवन कुमार जायसवाल ने जदयू के फैसल रहमान को हराया। 2015 में राजद के फैसल रहमान ने जायसवाल को 19,197 वोटों से पराजित किया।

2020 का परिणाम: 2020 के चुनाव में पवन जायसवाल ने भाजपा टिकट पर 99,792 वोट (48.01 प्रतिशत) हासिल कर राजद के फैसल रहमान को 10,114 वोटों के अंतर से पराजित किया।

2024 के लोकसभा चुनाव में राजद ने इस विधानसभा क्षेत्र में 12,818 वोटों से बढ़त बनाई थी, जो आगामी Bihar Assembly Election 2025 में भाजपा के लिए एक बड़ी चुनौती पेश करता है।

2025 के संभावित दावेदार और चुनावी मुद्दे

आगामी बिहार चुनाव में भाजपा ने एक बार फिर पवन जायसवाल को मैदान में उतारने की तैयारी की है। जायसवाल  राम रहीम सेना के संस्थापक और सामाजिक कार्यकर्ता हैं। वे सामूहिक विवाह जैसी योजनाओं के कारण स्थानीय स्तर पर लोकप्रिय हैं। वहीं, राजद ने फैसल रहमान को टिकट दिया है, जिनके पिता मोतिउर रहमान राज्यसभा सांसद रह चुके हैं। इससे यह मुकाबला फिर से कांटे की टक्कर वाला बनता दिख रहा है। स्थानीय मुद्दों की बात करें तो सिंचाई, बाढ़ नियंत्रण (जो मानसून में एक बड़ी समस्या है), पलायन, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं की कमी, और सीमा सुरक्षा प्रमुख हैं। यहां के मतदाता चंपारण सत्याग्रह में स्थानीय स्वतंत्रता सेनानी सियाराम ठाकुर के योगदान को भी याद करते हैं और क्षेत्र के विकास की मांग करते हैं।

ऐसा है वोटरों का आंकड़ा

चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, क्षेत्र की कुल आबादी 5,48,926 है, जिनमें 2,85,632 पुरुष और 2,63,294 महिलाएं हैं। वहीं, क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या 3,26,275 है, जिनमें 1,72,073 पुरुष और 1,54,188 महिलाएं शामिल हैं। 2020 में यहां 64.75 प्रतिशत मतदान हुआ था, जो ग्रामीण बहुल (91 प्रतिशत ग्रामीण मतदाता) इस सीट की सक्रियता और राजनीतिक जागरूकता को दर्शाता है।

ढाका विधानसभा सीट Bihar Politics में भाजपा और राजद के बीच वर्चस्व की लड़ाई का मैदान है। भारत-नेपाल सीमा से सटे होने के कारण यहां के राजनीतिक समीकरण राष्ट्रीय और स्थानीय दोनों स्तर के मुद्दों से प्रभावित होते हैं। 2025 में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ढाका के मतदाता पलायन और विकास के मुद्दों पर वर्तमान विधायक पर भरोसा करते हैं, या फिर राजद के नेतृत्व में बदलाव को चुनते हैं।

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