...तो चली जाएगी 42 विधायकों की विधायकी! पटना हाई कोर्ट ने भेजा नोटिस, बिहार के सियासी हलकों में मचा हड़कंप

Bihar Politics: चुनावी हलफनामे में गलत जानकारी देने और धांधली के मामले में पटना हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए सत्ताधारी और विपक्षी पार्टियों के 42 विधायकों को नोटिस जारी किया है।
42 mlas may face disqualification patna high court notice triggers bihar political panic
पटना हाई कोर्ट (सोर्स- सोशल मीडिया)
Published on
Updated on

Patna High Court: बिहार के सियासी हलकों में एक ताजा ताजातरीन ख़बर ने हड़कंप मचा कर रख दिया है। बीते साल अक्टूबर-नवंबर में हुए बिहार विधानसभा के दौरान चुनावी हलफनामे में गलत जानकारी देने और धांधली के मामले में पटना हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए सत्ताधारी और विपक्षी पार्टियों के 42 विधायकों को नोटिस जारी किया है।

कोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए सभी विधायकों को तय समय में सफाई देने का निर्देश दिया है। हाई कोर्ट के इस फैसले से बिहार में पॉलिटिकल भूचाल आ गया है। इस मामले में हाई कोर्ट ने जिन लोगों को तलब किया है, उनमें बिहार असेंबली के स्पीकर प्रेम कुमार और बिहार सरकार में मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव के साथ कुल 42 विधायक शामिल हैं।

जानिए क्या कुछ है पूरा मामला?

यह पूरा मामला बिहार असेंबली इलेक्शन के दौरान फाइल किए गए एफिडेविट से जुड़ा है। इन विधायकों के खिलाफ चुनाव लड़ रहे कैंडिडेट ने पटना हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। जिसमें आरोप लगाया गया है कि सभी 42 विधायकों ने नॉमिनेशन के दौरान अपने चुनावी हलफनामें में तथ्यों को छिपाया था।

42 विधायकों को HC का नोटिस

उसके अलावा कुछ मामलों में वोटिंग प्रोसेस में गड़बड़ी के आरोप भी लगाए गए हैं। शुरुआती सुनवाई के बाद पटना हाई कोर्ट ने मामले में सभी 42 विधायकों को नोटिस जारी कर जवाब देने को कहा है। विधायकों का जवाब देने के बाद मामले की सुनवाई आगे बढ़ेगी।

इन दिग्गजों को भी मिला है नोटिस

जिन 42 विधायकों को पटना हाई कोर्ट ने नोटिस मिला हैं उनमें बिहार विधानसभा के अध्यक्ष प्रेम कुमार, ऊर्जा मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव, पूर्व मंत्री जीवेश मिश्रा, बाहुबली आनंद मोहन के बेटे और विधायक चेतन आनंद के साथ-साथ राजद विधायक अमरेंद्र प्रसाद का नाम भी शामिल है।

...तो फिर चली जाएगी विधायकी

पूरा मामला अभी पटना हाई कोर्ट में है। हाई कोर्ट ने सभी आरोपी विधायकों को नोटिस का जवाब देने का निर्देश दिया है। यह देखना दिलचस्प होगा कि वे माननीय कोर्ट के सामने अपना बचाव कैसे करते हैं। अगर आरोप साबित हो जाते हैं तो कई विधायकों की सदस्यता खतरे में पड़ सकती है! इसका ताजा उदाहरण अभी दो दिन पहले ही कर्नाटक से सामने आया है।

कर्नाटक से आया था उदाहरण

2023 के कर्नाटक में बागेपल्ली सीट पर बीजेपी प्रत्याशी मुनिराजू को हराने वाले एसएन सुब्बा रेड्डी का चुनाव कर्नाटक हाई कोर्ट ने रद्द कर दिया है। भाजपा उम्मीदवार ने सुब्बा रेड्डी के नामांकन को अमान्य घोषित करने की मांग की थी। उनका आरोप था कि एसएन सुब्बा रेड्डी ने नामांकन पत्र में कई गलतियां थीं। उन्होंने अपनी संपत्ति की जानकारी छिपाई थी और एक फर्जी प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया था। प्रमाण पत्र में संपत्तियों के कर बकाया का भी उल्लेख नहीं किया गया था।

Navbharat Live
navbharatlive.com