कर्नाटक में छिन गई 'कांग्रेसी' की कुर्सी...हाई कोर्ट ने रद्द कर दिया चुनाव, एक गलती ने 3 साल बाद पलट दी बाजी!

Karnataka News: कर्नाटक HC ने कांग्रेस को बड़ा झटका देते हुए बागेपल्ली विधानसभा सीट से विधायक एसएन सुब्बा रेड्डी का 2023 का चुनाव रद्द कर दिया है। जिसके बाद सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
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कर्नाटक हाई कोर्ट (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Karnataka Chuanv 2023: कर्नाटक हाई कोर्ट ने कांग्रेस पार्टी को बड़ा झटका देते हुए बागेपल्ली विधानसभा सीट से विधायक एसएन सुब्बा रेड्डी का 2023 का चुनाव रद्द कर दिया है। अदालत ने नामांकन में मिली गड़बड़ियों और संपत्ति की जानकारी छिपाने को आधार बनाते हुए नतीजे को अमान्य घोषित कर दिया है। इस निर्णय के बाद सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है।

जस्टिस एमजीएस कमल की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट किया कि सुब्बा रेड्डी ने अपने चुनावी हलफनामे में संपत्ति और देनदारियों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी छिपाई थी। कोर्ट ने इसे चुनावी नियमों का उल्लंघन और अनुचित आचरण माना है। यह याचिका उनके प्रतिद्वंद्वी और भाजपा उम्मीदवार सी. मुनिराजू द्वारा दायर की गई थी, जिन्होंने नामांकन में जानबूझकर तथ्य छिपाने का आरोप लगाया था।

कौन बनेगा बागेपल्ली का विधायक?

हाई कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए सुब्बा रेड्डी का चुनाव निरस्त कर दिया है, हालांकि भाजपा उम्मीदवार मुनिराजू को निर्वाचित उम्मीदवार घोषित नहीं किया है। अदालत ने कहा कि आगे की कार्रवाई अब कानून के मुताबिक चुनाव आयोग करेगा।

हाई कोर्ट ने EC को दिया आदेश

कोर्ट ने चुनाव आयोग और कर्नाटक विधानसभा के सचिव को आदेश की सूचना देते हुए निर्देश दिया कि सुब्बा रेड्डी को विधायक के रूप में मिलने वाले सभी विशेषाधिकार और सुविधाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त की जाएं। सुनवाई के दौरान सुब्बा रेड्डी के वकील ने सुप्रीम कोर्ट में अपील करने के लिए फैसले पर रोक लगाने की मांग की थी, जिसे हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया और अंतरिम राहत देने से साफ इनकार कर दिया।

बीजेपी उम्मीदवार को दी थी मात

साल 2023 के कर्नाटक विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के एसएन सुब्बा रेड्डी ने बागेपल्ली क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी मुनिराजू को हराकर जीत हासिल की थी। हार के बाद भाजपा उम्मीदवार ने सुब्बा रेड्डी के नामांकन को अमान्य घोषित करने की मांग की थी।

उनका आरोप था कि एसएन सुब्बा रेड्डी द्वारा दाखिल नामांकन पत्र में कई गलतियां थीं। उन्होंने अपनी संपत्ति की जानकारी छिपाई थी और एक फर्जी प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया था। इसके अलावा, प्रमाण पत्र में संपत्तियों के कर बकाया का भी उल्लेख नहीं किया गया था। इन्ही दलीलों के आधार पर कोर्ट ने यह सख्त फैसला सुनाया है।

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