
Ola Electric (Source. Ola)
Ola Electric Share Price: भारतीय इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) सेक्टर की बड़ी कंपनी ओला इलेक्ट्रिक इस समय कठिन दौर से गुजर रही है। बीते महज तीन महीनों में कंपनी का शेयर करीब 40% तक टूट चुका है, जिससे लगभग 9,000 करोड़ रुपये की मार्केट वैल्यू साफ हो गई। हालात ऐसे हैं कि ओला का शेयर पिछले 14 ट्रेडिंग सेशनों में सिर्फ 3 दिन ही बढ़ पाया, जबकि अब यह अपने अब तक के सबसे निचले स्तर ₹30.79 के बेहद करीब पहुंच गया है।
कंपनी के भीतर हो रहे लगातार इस्तीफों ने भी शेयर पर दबाव बढ़ा दिया है। इस हफ्ते एक्सचेंज फाइलिंग में ओला इलेक्ट्रिक ने जानकारी दी कि कंपनी के CFO हरिश अबिचंदानी ने 19 जनवरी 2026 से पद छोड़ दिया है। उन्होंने इसके पीछे निजी कारण बताए हैं।
यह इस्तीफा इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि यह दो महीनों में दूसरा बड़ा इस्तीफा है। इससे पहले दिसंबर में कंपनी के बिजनेस हेड सेल, विशाल चतुर्वेदी ने भी निजी कारणों का हवाला देते हुए पद छोड़ा था। इन घटनाओं ने निवेशकों की चिंता और बढ़ा दी है।
कारोबारी मोर्चे पर भी ओला इलेक्ट्रिक को झटका लगा है। Vahan डेटा के अनुसार, साल 2025 में कंपनी का मार्केट शेयर घटकर 16.1% रह गया, जबकि पिछले साल यह 36.7% था। इस दौरान TVS, बजाज, Ather और Hero जैसी कंपनियों ने अपनी पकड़ मजबूत कर ली।
हालांकि, बीते महीने तस्वीर थोड़ी बदली नजर आई। VAHAN डेटा के मुताबिक, दिसंबर में ओला ने 9,020 यूनिट्स रजिस्टर कीं, जिससे कंपनी का मार्केट शेयर नवंबर के 7.2% से बढ़कर 9.3% हो गया। महीने के दूसरे हिस्से में यह आंकड़ा लगभग 12% तक पहुंच गया, जो ग्राहक मांग में सुधार का संकेत देता है।
कंपनी का दावा है कि दिसंबर में वह करीब एक दर्जन राज्यों में फिर से टॉप-3 EV कंपनियों में शामिल हो गई है। इनमें तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पंजाब और हरियाणा जैसे बड़े बाजार शामिल हैं। यह संकेत देता है कि जमीनी स्तर पर मांग अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।
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निवेशकों के मोर्चे पर भी ओला को झटका लगा है। मसयॉशी सोन की SoftBank Group ने ओला इलेक्ट्रिक में अपनी हिस्सेदारी 15.68% से घटाकर 13.53% कर दी है। स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग के अनुसार, SoftBank ने 3 सितंबर 2025 से 5 जनवरी 2026 के बीच 9.46 करोड़ शेयर खुले बाजार में बेचे।
SoftBank के अलावा Tiger Global और Alpha Wave Ventures जैसे विदेशी निवेशकों ने भी हिस्सेदारी घटाई है। जून में जिनकी हिस्सेदारी 3.24% और 2.83% थी, अब दोनों की हिस्सेदारी 1% से भी कम रह गई है।






