संजय शिरसाट के विभाग पर भ्रष्टाचार के आरोप, अविनाश जाधव ने उठाए टेंडर और निधि वितरण पर सवाल

Sanjay Shirsat News: महाराष्ट्र के सामाजिक न्याय विभाग में कथित करोड़ों के घोटाले का मामला सामने आया है। मनसे नेता अविनाश जाधव ने फडणवीस को पत्र लिखकर टेंडर प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
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संजय शिरसाट (सोर्सः सोशल मीडिया)
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Social Justice Department Scam: सामाजिक न्याय मंत्री संजय शिरसाट के विभाग में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोप लगातार सामने आ रहे हैं।

इस बार महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) नेता अविनाश जाधव ने महाराष्ट्र सरकार के सामाजिक न्याय विभाग में करोड़ों रुपए के कथित घोटाले का आरोप लगाया है।

जाधव ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर पूरे मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच की मांग की है। मनसे नेता जाधव ने अपने पत्र में आरोप लगाया है कि सामाजिक न्याय विभाग में योजनाओं के तहत निधि वितरण और टेंडर प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुई हैं।

उन्होंने दावा किया कि विभाग में कुछ अधिकारी मंत्री कार्यालय के प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए कामों का आवंटन कर रहे हैं और इसके बदले संबंधित व्यक्तियों से प्रतिशत की मांग की जा रही है। पत्र में यह भी कहा गया है कि विद्यार्थियों के छात्रावास और उनसे संबंधित विकास कार्यों में ऑनलाइन निविदा प्रक्रिया के नाम पर पहले से ही अग्रिम राशि लेकर कामों का बंटवारा किया गया। इससे पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

PA और अधिकारी पर भी आरोप

अविनाश जाधव ने मंत्री संजय शिरसाट के निजी सचिव भरत कदम पर भी गंभीर आरोप लगाए है। इसके अलावा विभाग में विशेष कार्यकारी अधिकारी के रूप में काम कर रहे सिद्धार्थ भंडारे की नियुक्ति को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। जाधव का आरोप है कि सिद्धार्थ भंडारे किसी आधिकारिक आदेश के बिना ही विभाग में कार्य कर रहे हैं, इसलिए उनकी नियुक्ति और अधिकारों की भी जांच की जानी चाहिए।

पहले भी लग चुके हैं आरोप

मंत्री शिरसाट इससे पहले सिडको से जुड़े मामले, छत्रपति संभाजीनगर के एक होटल से संबंधित प्रकरण और सामाजिक न्याय विभाग की निविदा प्रक्रिया को लेकर भी सवाल के घेरे में आ चुके है। अब एक और कथित घोटाले को लेकर उनके विभाग पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इस पूरे प्रकरण के सामने आने के बाद विभाग की प्रशासनिक कार्यप्रणाली और योजनाओं के तहत होने वाले खर्च पर भी प्रश्नविहन खड़े हो गए हैं।

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