कौन हैं Reza Pahlavi? ईरान में खामेनेई के खिलाफ गूंज रहा है निर्वासित क्राउन प्रिंस का नाम

Iran Protests: ईरान में महंगाई के खिलाफ प्रदर्शनों में निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी का नाम गूंज रहा है। अमेरिका समर्थित पहलवी परिवार क्या 46 साल बाद सत्ता में वापसी करेगा?
Who is Reza Pahlavi? Exiled Crown Prince's Name Echoes in Iran Protests Against Khamenei
निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी (सोर्स-सोशल मीडिया)
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Reza Pahlavi US Connection History: ईरान में जारी व्यापक जन-आंदोलन और महंगाई के खिलाफ बढ़ते गुस्से ने अब एक नया राजनीतिक मोड़ ले लिया है। तेहरान की सड़कों पर प्रदर्शनकारी न केवल सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई का विरोध कर रहे हैं, बल्कि निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी के समर्थन में नारे लगा रहे हैं। सरकार इन विरोध प्रदर्शनों के पीछे अमेरिकी 'डीप स्टेट' का हाथ मान रही है, जो अक्सर सत्ता परिवर्तन के लिए आंतरिक असंतोष का सहारा लेता है। करीब 46 वर्षों बाद पहलवी परिवार का नाम ईरान की सक्रिय राजनीति में इस तरह उभरना एक बड़े सत्ता परिवर्तन की ओर इशारा कर रहा है।

रजा पहलवी का इतिहास

रजा पहलवी ईरान के अंतिम शासक मोहम्मद रजा पहलवी के सबसे बड़े बेटे और उत्तराधिकारी हैं, जिनका परिवार 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद देश छोड़ने पर मजबूर हो गया था। 1980 में अपने पिता की मृत्यु के बाद उन्हें निर्वासित क्राउन प्रिंस घोषित किया गया था और तब से वे पश्चिमी देशों में रहकर ईरान में लोकतांत्रिक सुधारों की वकालत कर रहे हैं। वर्तमान में 65 वर्षीय रजा पहलवी उदारवादी मूल्यों और आधुनिक ईरान के समर्थकों के बीच एक प्रमुख चेहरे के रूप में देखे जाते हैं।

अमेरिका के साथ संबंध

पहलवी परिवार का अमेरिका के साथ गहरा कनेक्शन रहा है, क्योंकि रजा पहलवी ने स्वयं अमेरिका में पायलट के रूप में प्रशिक्षण प्राप्त किया था और वे लंबे समय से वहीं निवास कर रहे हैं। अमेरिकी 'डीप स्टेट' पर अक्सर यह आरोप लगते रहे हैं कि वह ईरान में खामेनेई शासन को अस्थिर करने के लिए रजा पहलवी जैसे नेताओं को गुप्त समर्थन प्रदान करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका ईरान में एक ऐसी सत्ता चाहता है जो पश्चिमी देशों की नीतियों के प्रति अधिक लचीला रुख अपनाए।

विरोध प्रदर्शनों का आधार

ईरान में मौजूदा अशांति का मुख्य कारण अर्थव्यवस्था की बदहाली और आसमान छूती महंगाई है, जिसने आम नागरिकों का जीवन दूभर कर दिया है। लोग पुरानी राजशाही के दौर को याद कर रहे हैं जब ईरान की अर्थव्यवस्था अपेक्षाकृत स्थिर थी और सामाजिक नियम अधिक उदार माने जाते थे। इसी भावना के चलते युवाओं की एक बड़ी संख्या सड़कों पर 'पहलवी' के नाम के नारे लगाकर शासन को चुनौती दे रही है।

इस्लामिक क्रांति की विरासत

1979 की इस्लामिक क्रांति ने ईरान को एक संवैधानिक राजशाही से एक धार्मिक शासन व्यवस्था में बदल दिया था, जिससे पहलवी वंश का प्रभाव पूरी तरह समाप्त हो गया। अयातुल्लाह खामेनेई के नेतृत्व में ईरान ने एक कट्टरपंथी रुख अपनाया, जिससे अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ उसके संबंधों में स्थायी कड़वाहट आ गई। अब वही पुरानी रंजिश फिर से सड़कों पर दिखाई दे रही है, जहां लोग दशकों पुराने शासन को उखाड़ फेंकने की बात कर रहे हैं।

भविष्य की संभावनाएं

क्या रजा पहलवी वास्तव में ईरान लौट पाएंगे और सत्ता संभालेंगे, यह अभी भी एक बड़ा कूटनीतिक सवाल बना हुआ है। हालांकि प्रदर्शनों में उनका नाम गूंज रहा है, लेकिन ईरानी सुरक्षा बल और डीप स्टेट की जड़ें अभी भी शासन में काफी मजबूत हैं। अगर अमेरिका का राजनीतिक समर्थन और आंतरिक असंतोष इसी तरह बढ़ता रहा, तो ईरान में पांच दशकों बाद फिर से इतिहास खुद को दोहरा सकता है।

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