डोनाल्ड ट्रंप और खामेनेई, फोटो (सो.सोशल मीडिया)
Donald Trump Iran Nuclear Deal: दुनिया के दो सबसे कट्टर दुश्मन माने जाने वाले देश अमेरिका और ईरान एक बार फिर बातचीत की मेज पर लौटने को तैयार हैं। तुर्की के इस्तांबुल में शुक्रवार, 6 फरवरी को एक उच्च स्तरीय राउंड टेबल मीटिंग आयोजित की जाएगी।
यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब दोनों देशों के बीच तनाव युद्ध के मुहाने पर पहुंच गया है। इस वार्ता में अमेरिका की तरफ से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रतिनिधि स्टीव विटकॉफ और ईरान की तरफ से विदेश मंत्री अब्बास अराघची शामिल होंगे।
सूत्रों के अनुसार, अमेरिका ने बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए ईरान के सामने तीन मुख्य शर्तें रखी हैं:
ईरान ने अमेरिका की इन मांगों पर कड़ा रुख अपनाया है। विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने साफ कर दिया है कि ईरान अपनी सुरक्षा से समझौता नहीं करेगा और बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम पर कोई बातचीत नहीं होगी। ईरान की मुख्य शर्त यह है कि अमेरिका पहले सैन्य कार्रवाई की धमकियां बंद करे और उस पर लगे कड़े आर्थिक प्रतिबंधों को हटाए जिससे उसकी अर्थव्यवस्था और करेंसी को राहत मिल सके।
इस्तांबुल में होने वाली इस बैठक में केवल अमेरिका और ईरान ही नहीं, बल्कि मध्य-पूर्व की कई बड़ी शक्तियां भी मौजूद रहेंगी। इनमें सऊदी अरब, मिस्र, तुर्की, कतर और संयुक्त अरब अमीरात के प्रतिनिधि शामिल होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इन देशों की मौजूदगी यह तय करेगी कि क्षेत्र में स्थिरता आएगी या तनाव और बढ़ेगा। बैठक से पहले अमेरिकी प्रतिनिधि स्टीव विटकॉफ ने इजरायल का भी दौरा किया जहां उन्होंने पीएम नेतन्याहू से मुलाकात की।
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हाल के समय में ईरान में हुए विरोध प्रदर्शनों, जिसमें कथित तौर पर 35 हजार लोगों की मौत हुई है जिसके बाद से खामेनेई शासन पर दबाव बढ़ गया है। दूसरी तरफ, डोनाल्ड ट्रंप ने बार-बार सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दी है और अमेरिकी नौसैनिक बेड़ा भी ईरान की ओर बढ़ रहा है। इन धमकियों के बीच इस्तांबुल की यह वार्ता कूटनीति का आखिरी मौका मानी जा रही है।