चीनी जहाज, फोटो (सो.सोशल मीडिया)
Iran US Tension Latest News In Hindi: अरब सागर में इन दिनों भारी कूटनीतिक और सैन्य तनाव का माहौल है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती तल्खी के बीच चीन की एक संदिग्ध गतिविधि ने वाशिंगटन की चिंता बढ़ा दी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, चीन का आधुनिक रिसर्च जहाज ‘दायांग यीहाओ’ अमेरिकी विमानवाहक पोत USS अब्राहम लिंकन के बेहद करीब देखा गया है।
इस घटना के बाद वैश्विक रक्षा विशेषज्ञों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या चीन, अमेरिका की गुप्त सैन्य गतिविधियों और मूवमेंट की लाइव जानकारी ईरान को साझा कर रहा है।
दायांग यीहाओ चीन का पहला आधुनिक समुद्री वैज्ञानिक अनुसंधान जहाज है, जो रीयल-टाइम डेटा संग्रह की अत्याधुनिक तकनीकों से लैस है। इस जहाज में समुद्र की गहराई और सतह के नीचे की बनावट को रीयल-टाइम में मैप करने वाली एडवांस तकनीक लगी हुई है। यह जहाज न केवल समुद्र में होने वाली असामान्य आवाजों की निगरानी कर सकता है बल्कि इसमें हाई-स्पीड सैटेलाइट कम्युनिकेशन और वायरलेस इंटरनेट की भी सुविधा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन क्षमताओं का उपयोग किसी भी सैन्य अभियान की टोह लेने के लिए किया जा सकता है।
शिप ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, यह चीनी जहाज 19 दिसंबर से ही भारत के पश्चिम में अरब सागर क्षेत्र में सक्रिय है और लगातार सर्वे कर रहा है। ओपन सोर्स इंटेलिजेंस एक्सपर्ट MenchOsint के अनुसार, यह जहाज अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर के पास वाले समुद्री इलाके में ही काम कर रहा था।
हालांकि दोनों जहाजों के बीच की सटीक दूरी अभी साफ नहीं है लेकिन 27 जनवरी के बाद यह चीनी जहाज ईरान के तट से करीब 320 किलोमीटर दक्षिण की ओर देखा गया था। वर्तमान में यह जहाज भारत-पाकिस्तान और अरब सागर के तटों के पास बना हुआ है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम और प्रदर्शनकारियों पर की गई कार्रवाई को लेकर कड़ा रुख अपनाया है और हमले तक की धमकी दी है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर ही USS अब्राहम लिंकन को दक्षिण चीन सागर से हटाकर मिडिल ईस्ट भेजा गया है। जवाब में ईरान ने भी कड़े संकेत दिए हैं और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट में दो दिवसीय ‘लाइव फायर’ नौसैनिक अभ्यास की घोषणा की है। गौरतलब है कि दुनिया का लगभग 20% तेल व्यापार इसी रास्ते से होता है।
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चीन ने इस पूरे मामले में अब तक संतुलित रुख अपनाने का दावा किया है। चीन के विदेश मंत्री वांग यी का कहना है कि वे बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने का समर्थन करते हैं। हालांकि, पर्दे के पीछे की कहानी अलग हो सकती है क्योंकि चीन और ईरान ने साल 2016 में एक रणनीतिक साझेदारी समझौता किया था जिसमें रक्षा और सैन्य सहयोग बढ़ाने पर विशेष सहमति बनी थी। यही कारण है कि अरब सागर में चीनी जहाज की मौजूदगी को अमेरिकी मूवमेंट की निगरानी से जोड़कर देखा जा रहा है।