कुर्द लड़ाकों से 'गद्दारी'! ट्रंप ने पुराने साथी SDF को बीच मंझधार में छोड़ा, सीरियाई सरकार से मिलाया हाथ

US Syria Policy: सीरिया में सत्ता परिवर्तन के बाद अमेरिका ने अपने सबसे भरोसेमंद सहयोगी कुर्द लड़ाकों (SDF) का साथ छोड़ दिया है। ट्रंप प्रशासन अब नई अल-शरा सरकार का समर्थन कर रहा है।
'Betrayal' of Kurdish fighters! Trump abandons long-time ally SDF and joins hands with the new government.
अहमद अल-शारा और डोनाल्ड ट्रंप, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
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Donald Trump Syria News In Hindi:  सीरिया के रणक्षेत्र में पिछले दो हफ्तों के भीतर जो बदलाव आए हैं, उसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है। कभी इस्लामिक स्टेट (IS) के खिलाफ जंग में अमेरिका के सबसे मजबूत कंधे रहे सीरियन डेमोक्रेटिक फोर्सेज (SDF) यानी कुर्द लड़ाकों को उनके सबसे बड़े सहयोगी ने ही अकेला छोड़ दिया है।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाले अमेरिका ने अब SDF का साथ छोड़कर दमिश्क में बनी नई अहमद अल-शरा की अंतरिम सरकार का खुलकर समर्थन करना शुरू कर दिया है।

मैदान-ए-जंग में कैसे पलटी बाजी?

6 जनवरी को उत्तरी शहर अलेप्पो में हुई भारी झड़पों ने इस बदलाव की नींव रखी। सूत्रों के अनुसार, सीरियाई सरकारी सेना ने एक बड़ा हमला किया, जिसके बाद SDF को उत्तर-पूर्वी सीरिया के अपने अधिकांश ठिकानों से पीछे हटना पड़ा। विशेषज्ञों का मानना है कि SDF नेतृत्व ने जमीनी हकीकत को समझने में बड़ी भूल की। उन्हें भरोसा था कि यदि नई सरकार के साथ टकराव हुआ तो अमेरिका पहले की तरह अपनी सेना और हथियार लेकर उनके बचाव में आएगा। लेकिन इस बार अमेरिका ने सैन्य दखल देने के बजाय केवल सीजफायर की औपचारिक कोशिशें कीं जिससे SDF को कमजोर शर्तों पर समझौता करने के लिए मजबूर होना पड़ा।

ट्रंप का नया समीकरण और SDF का अंत?

दिसंबर 2024 में बशर अल-असद को सत्ता से हटाने के बाद बनी अहमद अल-शरा की सरकार ने बहुत कम समय में अमेरिका का भरोसा जीत लिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस नई सरकार को मान्यता दी है। अमेरिकी सीरिया दूत टॉम बैरक के बयानों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अब IS के खिलाफ लड़ाई में कुर्द लड़ाकों की भूमिका लगभग समाप्त हो चुकी है। अमेरिका का मानना है कि नई सीरियाई सरकार अब अपनी सुरक्षा खुद संभालने में सक्षम है इसलिए उन्हें अलग से किसी सशस्त्र समूह को बनाए रखने की आवश्यकता नहीं है।

तेल क्षेत्रों और कैदियों पर नियंत्रण

मार्च 2025 में हुए एक समझौते के तहत यह तय हुआ था कि SDF के हजारों लड़ाकों को नई सीरियाई सेना में शामिल किया जाएगा लेकिन आपसी मतभेदों और कुर्द नेतृत्व की बड़ी मांगों के कारण यह बातचीत महीनों तक लटकी रही।

अंततः जब अलेप्पो में लड़ाई तेज हुई तो SDF को घुटने टेकने पड़े। अब तेल समृद्ध इलाकों जैसे रक्का और देइर अल-जोर पर सरकार का कब्जा हो गया है। इसके अलावा, अमेरिका ने उत्तर-पूर्वी सीरिया की जेलों में बंद IS के खतरनाक कैदियों को इराक की सुरक्षित जेलों में शिफ्ट करना शुरू कर दिया है, जो इस बात का संकेत है कि अब अमेरिका को इस क्षेत्र में कुर्दों की निगरानी की जरूरत नहीं रही।

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