रूस-चीन ने किनारा किया... फिर भी पास हुआ अमेरिका का गाजा प्रस्ताव, मिडिल ईस्ट में हलचल तेज

UN Trump Plan For Gaza: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने गाजा में स्थायित्व बहाल करने और भविष्य की राजनीतिक व्यवस्था तय करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए अमेरिकी प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
Russia and China abstained... yet America's Gaza proposal passed, sparking unrest in the Middle East
अमेरिका का गाजा प्रस्ताव पास, (डिजाइन फोटो)
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United Nations Gaza Proposal: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने गाजा के लिए अमेरिकी प्रस्तावित योजना को मंजूरी देकर उस क्षेत्र में शांति और प्रशासनिक स्थिरता स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लिया है।

इस प्रस्ताव के तहत एक अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बल की तैनाती की जाएगी, जिसका उद्देश्य युद्ध से तबाह हो चुके गाजा में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करना, सीमाओं की निगरानी करना और असैन्यीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना है। यह कदम भविष्य में एक स्वतंत्र और स्थायी फिलिस्तीनी राष्ट्र की संभावनाओं का मार्ग भी प्रशस्त करता है।

रूस और चीन ने नहीं लिया हिस्सा

अमेरिका द्वारा पेश की गई इस योजना को 13 सदस्यों का समर्थन मिला, जबकि रूस और चीन ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया। अमेरिका और उसके सहयोगियों को पहले से उम्मीद थी कि रूस अपने वीटो का प्रयोग नहीं करेगा, क्योंकि मध्य पूर्व में बिगड़ते हालात को देखते हुए यह प्रस्ताव वैश्विक शांति प्रयासों का अहम हिस्सा था। यह मतदान हालिया युद्ध विराम के बाद गाजा में दीर्घकालिक स्थिरता लाने और लगभग दो वर्षों तक चले इजरायल-हमास संघर्ष के बाद पुनर्निर्माण के लिए आधार तैयार करने का प्रयास माना जा रहा है। कई अरब और मुस्लिम देशों ने भी इस अंतरराष्ट्रीय बल में अपने सैनिक भेजने की इच्छा जताई है। हालांकि, इसके लिए सुरक्षा परिषद की मंजूरी अनिवार्य थी, जो अब मिल चुकी है। प्रस्ताव को पारित कराने में इन देशों का समर्थन अहम रहा।

मध्य पूर्व नीति में नई भूमिका

इस योजना का नेतृत्व अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप करेंगे। प्रस्ताव में उल्लिखित 20-सूत्रीय युद्ध विराम योजना में एक अंतरिम "शांति बोर्ड" के गठन का भी उल्लेख है, जिसकी कमान ट्रंप संभालेंगे। इस बोर्ड को 2027 के अंत तक गाजा की सुरक्षा, सीमा नियंत्रण और शांतिपूर्ण वातावरण सुनिश्चित करने का अधिकार दिया गया है। यह कदम ट्रंप की मध्य पूर्व नीति में नई भूमिका की शुरुआत भी दर्शाता है।

उधर, मतदान से ठीक पहले रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच फोन पर महत्वपूर्ण वार्ता हुई। दोनों नेताओं ने गाजा के मौजूदा हालात, क्षेत्रीय तनाव और संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी प्रस्ताव पर चर्चा की। इस बातचीत को कूटनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि रूस ने मतदान से दूरी बनाकर अप्रत्यक्ष रूप से इस प्रस्ताव के पारित होने का रास्ता आसान किया।

सुरक्षा परिषद की मंजूरी के बाद अब अगला चरण अंतरराष्ट्रीय बल की संरचना, तैनाती और संचालन तंत्र को अंतिम रूप देने का है। गाजा में वर्षों पुराने संकट के समाधान की यह योजना कितनी सफल होगी, इसे लेकर वैश्विक निगाहें अब संयुक्त राष्ट्र और क्षेत्रीय देशों की आगे की रणनीति पर टिकी हैं।

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