यूक्रेन-रूस शांति वार्ता: अबू धाबी में 314 कैदियों की रिहाई पर बनी सहमति, लेकिन बड़े समझौते पर पेंच फंसा

Abu Dhabi Meeting: अबू धाबी में अमेरिका के नेतृत्व में हुई रूस-यूक्रेन वार्ता के दूसरे दिन किसी बड़े 'ब्रेकथ्रू' के बिना संपन्न हुई, हालांकि दोनों पक्ष 314 युद्धबंदियों की अदला-बदली पर सहमत हो गए हैं।
Ukraine-Russia peace talks: Agreement reached in Abu Dhabi on the release of 314 prisoners, but a major agreement remains elusive.
यूक्रेन रूस शांति वार्ता अबू धाबी बैठक, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
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Ukraine Russia Peace Talks News In Hindi: द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यूरोप के सबसे घातक जंग को समाप्त करने की दिशा में संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी अबू धाबी में जारी दो दिवसीय शांति वार्ता का दूसरा दौर गुरुवार को बिना किसी बड़े नतीजे के समाप्त हो गया। हालांकि, महीनों के अंतराल के बाद कीव और मॉस्को के वरिष्ठ प्रतिनिधिमंडलों के बीच हुई इस मुलाकात को कूटनीतिक प्रयासों की एक नई शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।

युद्धबंदियों की अदला-बदली

इस वार्ता का सबसे महत्वपूर्ण और ठोस परिणाम युद्धबंदियों की अदला-बदली के रूप में सामने आया है। दोनों पक्ष एक-दूसरे के 157-157 कैदियों (कुल 314) को रिहा करने पर सहमत हुए हैं। रूसी रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी तस्वीरों में कैदियों को बसों में सवार होते देखा गया है। राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने इसे एक सकारात्मक परिणाम बताया हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि वार्ता आसान नहीं थी।

अमेरिकी दूत की भूमिका और भविष्य की चुनौतियां

इस बैठक में अमेरिका की ओर से डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ शामिल थे। विटकॉफ ने वार्ता के बाद सावधानी बरतते हुए कहा कि आने वाले हफ्तों में अभी महत्वपूर्ण कार्य शेष है जिससे उन्होंने किसी भी तत्काल शांति समझौते की उम्मीदों को फिलहाल कम कर दिया है। वहीं, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने जानकारी दी कि पहली बार रूस और यूक्रेन की तकनीकी सैन्य टीमें इस प्रारूप में आमने-सामने बैठी हैं।

क्षेत्रीय मांगों पर बरकरार है मतभेद

सकारात्मक माहौल के बावजूद, शांति समझौते की राह में मुख्य बाधा मॉस्को की क्षेत्रीय मांगें बनी हुई हैं। क्रेमलिन का स्पष्ट रुख है कि किसी भी समझौते के लिए यूक्रेन को पूरे पूर्वी डोनबास क्षेत्र को रूस के हवाले करना होगा। दूसरी ओर, यूक्रेनी अधिकारियों ने इन शर्तों को खारिज कर दिया है और वर्तमान फ्रंटलाइन पर युद्धविराम की मांग की है। पुतिन ने संकेत दिए हैं कि जब तक उनकी कड़ी शर्तें नहीं मानी जातीं वे युद्ध को लंबा खींचने के लिए तैयार हैं।

मैदान-ए-जंग की हकीकत

यह वार्ता ऐसे समय में हुई है जब रूस ने यूक्रेन के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमले तेज कर दिए हैं जिससे देश का बड़ा हिस्सा ब्लैकआउट में डूब गया है। हालांकि, कड़ाके की ठंड और यूक्रेनी प्रतिरोध के कारण रूसी सेना की जमीनी बढ़त पिछले साल के मुकाबले धीमी हुई है। यूक्रेन के सैन्य खुफिया प्रमुख किरिलो बुडानोव ने इस त्रिपक्षीय वार्ता को वास्तव में उपयोगी बताया और भविष्य में भी इसे जारी रखने की बात कही है।

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