किस दिन है महाशिवरात्रि 2026, यहां से नोट कीजिए चार प्रहर की पूजा का शुभ मुहूर्त

Shiva linga worship: महाशिवरात्रि हिन्दू धर्म का सबसे पावन पर्वों में से एक है। महाशिवरात्रि 2026 चार प्रहर पूजा का शुभ मुहूर्त जानें, शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र अर्पित कर “ॐ नमः शिवाय” का जाप करें
Mahashivratri 2026 Char Pahar Ki Puja Ka Samay
शिव पार्वती (सौ.सोशल मीडिया)
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Mahashivratri 2026 Char Pahar Ki Puja Ka Samay: शिव और शक्ति के मिलन का प्रतीक महाशिवरात्रि का महापर्व हिन्दू धर्म का सबसे पावन पर्वों में से एक है। ज्योतिष- शास्त्र के अनुसार, इस बार महाशिवरात्रि का महापर्व बहुत शुभ मानी जा रही है।

क्योंकि इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और प्रदोष का दुर्लभ संयोग एक साथ बन रहा है। यह शिव और शक्ति के मिलन का प्रतीक है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन पूजा-पाठ और व्रत करने से जीवन में खुशहाली आती है। साथ ही मनचाहे वर की प्राप्ति भी होती है। ऐसे में आइए इस दिन से जुड़ी प्रमुख बातों को जानते हैं, जो इस प्रकार हैं -

महाशिवरात्रि पर सर्वार्थ सिद्धि योग और प्रदोष का संयोग

ज्योतिष गणना के अनुसार, इस साल 2026 में महाशिवरात्रि पर सर्वार्थ सिद्धि योग और प्रदोष का संयोग बन रहा है। सालों बाद ऐसा अवसर आया है, जब शिव पूजा के समय चंद्रमा अपनी उच्च राशि के निकट होगा, जिससे मानसिक शांति और आर्थिक बाधाओं से मुक्ति मिलेगी।

ऐसा बताया जा रहा है कि, इस योग में की गई पूजा का फल दुगना मिलता साथ ही सभी मनोकामनाएं भी पूरी होती है।

महाशिवरात्रि पर द्वितीय प्रहर पूजा का समय -

रात्रि में 09:09 से लेकर 16 फरवरी 2026 को 00:17 बजे तक।

महाशिवरात्रि पर तृतीय प्रहर पूजा का समय -

16 फरवरी 2026 को पूर्वाहन 00:17 से लेकर 03:25 बजे तक।

महाशिवरात्रि पर चतुर्थ प्रहर पूजा का समय - 16 फरवरी 2026 को पूर्वाह्न 03:25 से लेकर प्रात: 06:33 बजे तक।

ऐसे करें महाशिवरात्रि पर पूजा

  • महाशिवरात्रि के दिन सूर्योदय से पहले उठकर गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
  • पूजा के लिए सफेद या पीले रंग के वस्त्र धारण करें।
  • हाथ में जल, अक्षत और फूल लेकर भगवान शिव के सामने व्रत का संकल्प लें।
  • शिवलिंग पर सबसे पहले जल चढ़ाएं।
  • फिर दूध, दही, घी, शहद और शक्कर चढ़ाएं।
  • अंत में शुद्ध जल या गंगाजल चढ़ाएं।
  • तीन पत्तों वाला बिल्व पत्र 'ॐ नमः शिवाय' बोलकर चढ़ाएं।
  • महादेव को धतूरे का फल, फूल और भांग भी चढ़ाएं।
  • सफेद चंदन का तिलक लगाएं।
  • बिना टूटे हुए चावल अर्पित करें।
  • आक, कनेर या सफेद फूल चढ़ाएं।
  • गाय के घी का दीपक जलाएं।
  • ऋतु फल और सफेद मिठाई का भोग लगाएं।
  • पूजा के दौरान 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप करें।
  • शिव चालीसा का पाठ करें।
  • अंत में कपूर और दीपक से आरती करें।
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