'अफगानिस्तान में फ्रंटलाइन से दूर रहे नाटो सैनिक'; ट्रंप के बयान पर भड़का ब्रिटेन, छिड़ा सियासी घमासान

Trump NATO Statement: डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अफगानिस्तान युद्ध में नाटो सहयोगी अग्रिम मोर्चे से पीछे रहे। इस बयान ने ब्रिटिश सांसदों और पूर्व सैनिकों के बीच भारी आक्रोश है।
'NATO troops stayed away from the front lines in Afghanistan'; Britain angered by Trump's statement, sparking a political storm.
नाटो पर डोनाल्ड ट्रंप का बयान, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
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NATO Casualties Afghanistan: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। एक साक्षात्कार में ट्रंप ने दावा किया कि अफगानिस्तान में 20 साल चले लंबे संघर्ष के दौरान नाटो देशों के सैनिक फ्रंटलाइन से दूर रहे थे। ट्रंप ने कहा, 'हमें कभी उनकी जरूरत नहीं पड़ी। वे कहेंगे कि उन्होंने अफगानिस्तान में कुछ सैनिक भेजे थे और उन्होंने भेजे भी थे लेकिन वे फ्रंटलाइन से थोड़ा पीछे, थोड़ा हटकर रहे।'

ब्रिटेन में भारी आक्रोश और आलोचना

ट्रंप के इस बयान ने ब्रिटेन के राजनीतिक गलियारों और पूर्व सैनिकों के बीच गुस्से की लहर पैदा कर दी है। ब्रिटिश सांसदों ने राष्ट्रपति की टिप्पणियों की कड़ी निंदा करते हुए इसे उन सैनिकों का अपमान बताया है जिन्होंने युद्ध में अपनी जान गंवाई।

लेबर पार्टी के सांसद और पूर्व आरएएफ अधिकारी केल्विन बेली जिन्होंने अफगानिस्तान में अमेरिकी विशेष अभियान इकाइयों के साथ काम किया था उन्होंने कहा कि ट्रंप का दावा उन लोगों द्वारा अनुभव की गई वास्तविकता से बिल्कुल मेल नहीं खाता जिन्होंने वहां सेवा की थी।

कॉमन डिफेंस कमेटी के अध्यक्ष तन ढेसी ने इन टिप्पणियों को अपमानजनक बताया और कहा कि यह उन बहादुर ब्रिटिश सैनिकों का अपमान है जिन्होंने अपने सहयोगियों की मदद के लिए अपने जीवन को दांव पर लगा दिया। इसी तरह, कंजर्वेटिव सांसद बेन ओबेसी-जेक्टी ने कहा कि यह देखना दुखद है कि अमेरिकी राष्ट्रपति हमारे राष्ट्र और नाटो भागीदारों के बलिदान को इतनी तुच्छता से देख रहे हैं।

बलिदान के आंकड़े ट्रंप के दावे के विपरीत

आंकड़े ट्रंप के दावों पर सवालिया निशान लगाते हैं। बीते 20 वर्षों तक चले इस संघर्ष में कुल 3,486 नाटो सैनिकों की जान गई। इनमें 2,461 अमेरिकी सैनिक शामिल थे जबकि ब्रिटेन के 457 जवानों ने भी बलिदान दिया। कनाडा ने इस दौरान 165 सैनिकों और नागरिकों को खोया। वहीं डेनमार्क में अमेरिका के बाहर प्रति व्यक्ति मौतों की दर सबसे ज्यादा रही जहां 44 सैनिक शहीद हुए।

ट्रंप के अपने सैन्य रिकॉर्ड पर उठे सवाल

आलोचकों ने ट्रंप के बयान पर पलटवार करते हुए उनके अपने इतिहास की ओर इशारा किया है। उदारवादी लोकतांत्रिक नेता एड डेवी सहित कई लोगों ने याद दिलाया कि ट्रंप ने खुद पांच बार सैन्य सेवा (वियतनाम युद्ध) से परहेज किया था।

पूर्व सैनिक और लेखक स्टीफन स्टीवर्ट ने कहा कि यह बेहद विडंबनापूर्ण है कि जिस व्यक्ति ने कथित तौर पर वियतनाम युद्ध के लिए ड्राफ्ट को चकमा दिया वह ऐसा अपमानजनक बयान दे रहा है। उन्होंने कहा कि ट्रंप ने उन सैकड़ों ब्रिटिश सैनिकों की यादों का अपमान किया है जिन्होंने अफगानिस्तान में सर्वोच्च बलिदान दिया।