Switzerland Club Fire: बार मालिक ने तोड़ी चुप्पी, कहा- हादसे के बाद हम खाना-सोना भूल गए

Bar Owner Silence: स्विट्जरलैंड के क्रांस-मोंटाना बार में आग लगने से 40 की मौत के बाद मालिक जैक्स मोरेटी ने दुख जताया। फाउंटेन कैंडल को आग का कारण बताया जा रहा है, जिससे जश्न मातम में बदल गया।
Switzerland Club Fire: Bar Owner Breaks Silence After 40 Deaths in Crans-Montana
स्विट्जरलैंड बार मालिक जैक्स मोरेटी (सोर्स-सोशल मीडिया)
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Switzerland Bar Fire Cause 2026: स्विट्जरलैंड के प्रसिद्ध स्की रिसॉर्ट क्रांस-मोंटाना में नए साल के जश्न के दौरान हुई भीषण त्रासदी ने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया है। एक लग्जरी बार 'ले कॉन्स्टेलेशन' में लगी भीषण आग में 40 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई और 119 अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। इस हादसे के बाद बार के मालिक जैक्स मोरेटी ने पहली बार अपनी चुप्पी तोड़ते हुए गहरा दुख और पश्चाताप व्यक्त किया है। उन्होंने बताया कि यह घटना उनके और उनके परिवार के लिए एक कभी न भूलने वाला डरावना सपना बन गई है।

सदमे में बार मालिक का परिवार

बार के मालिक जैक्स मोरेटी ने एक इंटरव्यू में बताया कि वे और उनकी पत्नी जेसिका इस हादसे से गहरे सदमे में हैं। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि उस रात के बाद से वे न तो सो पा रहे हैं और न ही कुछ खा पा रहे हैं। उनकी पत्नी जेसिका उस समय बार में ही मौजूद थीं और उन्हें भी इस अग्निकांड में मामूली चोटें आई हैं।

सुरक्षा मानकों पर दी सफाई

जैक्स ने बताया कि उन्होंने यह बार साल 2015 में खरीदा था और पिछले दस वर्षों में तीन बार सुरक्षा निरीक्षण हो चुका था। उनके अनुसार बार में सभी इंतजाम नियमों के मुताबिक थे और उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि ऐसी कोई त्रासदी होगी। वे अब स्थानीय प्रशासन और जांच टीमों को पूरी तरह से सहयोग करने का भरोसा दे रहे हैं।

कैसे भड़की विनाशकारी आग

शुरुआती जांच में सामने आया है कि शैम्पेन की बोतलों पर लगी 'फाउंटेन कैंडल्स' (आतिशबाजी वाली मोमबत्ती) इस तबाही की मुख्य वजह बनी। जब इन जलती हुई मोमबत्तियों को ऊपर उठाया गया, तो उनकी लपटें सीधे छत के संपर्क में आ गईं। छत पर ज्वलनशील सामग्री होने के कारण आग पलक झपकते ही पूरे हॉल में फैल गई और धुआं भर गया।

निकास द्वार की बड़ी समस्या

प्रत्यक्षदर्शियों और जांच रिपोर्ट के अनुसार बार के ग्राउंड फ्लोर से बाहर निकलने का रास्ता काफी संकरा था। आग लगने के समय लगभग 300 लोग वहां मौजूद थे और पतली सीढ़ी होने के कारण भगदड़ मच गई। पर्याप्त निकास द्वार न होने की वजह से लोग समय पर बाहर नहीं निकल सके, जिससे मरने वालों का आंकड़ा इतना बड़ा हो गया।

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