जीरो ग्रैविटी, हाई रिस्क, जानें धरती से दूर किन खतरों से जूझते हैं एस्ट्रोनॉट्स

नासा के मानव अनुसंधान कार्यक्रम के अनुसार, अंतरिक्ष यात्रियों को अपने मिशन के दौरान पांच प्रमुख खतरों का सामना करना पड़ता है। अंतरिक्ष में पृथ्वी की तुलना में रेडिएशन का स्तर कहीं अधिक होता है और...
जीरो ग्रैविटी, हाई रिस्क... जानें धरती से दूर किन जोखिमों से जूझते हैं एस्ट्रोनॉट्स
. जानें धरती से दूर किन जोखिमों से जूझते हैं एस्ट्रोनॉट्स, फोटो (सो.सोशल मीडिया)
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अंतरिक्ष यात्रा एक रोमांचक लेकिन बेहद जोखिमभरा अभियान होता है। यह केवल तकनीकी चुनौतियों से ही नहीं, बल्कि मानव शरीर पर पड़ने वाले गंभीर प्रभावों से भी जुड़ा होता है। अंतरिक्ष में पृथ्वी की तुलना में रेडिएशन का स्तर कहीं अधिक होता है और वहां गुरुत्वाकर्षण लगभग न के बराबर होता है। माइक्रोग्रैविटी की यह स्थिति अंतरिक्ष यात्रियों के शरीर पर गहरा असर डालती है, जिससे पृथ्वी पर लौटने के बाद उन्हें सामान्य स्थिति में आने में लंबा समय लग सकता है।

नासा के मानव अनुसंधान कार्यक्रम के अनुसार, अंतरिक्ष में यात्रा करने वाले लोगों को पांच प्रमुख प्रकार के खतरों का सामना करना पड़ता है। इनमें मुख्य अंतरिक्ष विकिरण, एकांत और सामाजिक अलगाव, पृथ्वी से अत्यधिक दूरी, गुरुत्व बल की कमी, और सीमित एवं बंद वातावरण। ये सभी कारक एक-दूसरे के प्रभाव को बढ़ा सकते हैं और मिलकर शरीर और मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल सकते हैं।

मानव शरीर को गंभीर नुकसान

पृथ्वी के सुरक्षात्मक चुंबकीय आवरण और वायुमंडल से बाहर, अंतरिक्ष में मौजूद घातक विकिरण मंगल की यात्रा पर निकलने वाले अंतरिक्ष यात्रियों के लिए एक बड़ा खतरा बन सकता है। सुपरनोवा विस्फोटों से निकलने वाली उच्च-ऊर्जा वाली गैलेक्टिक कॉस्मिक रेज और सूर्य के तूफानों से उत्पन्न होने वाले सौर कण अंतरिक्ष यान और मानव शरीर को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं।

अंतरिक्ष में यात्रा के दौरान यात्री इन खतरनाक विकिरणों को न तो देख पाते हैं और न ही महसूस कर पाते हैं। इस चुपके खतरे से निपटने के लिए नासा के वैज्ञानिक लगातार मानव शरीर पर विकिरण के प्रभावों का अध्ययन कर रहे हैं और इससे बचाव के नए तरीके विकसित कर रहे हैं।

अंतरिक्ष में एस्ट्रोनॉट्स
अंतरिक्ष में एस्ट्रोनॉट्स

इन गंभीर चुनौतियों का करना पड़ता सामना

अंतरिक्ष यात्रियों को कई गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जो हमारी सोच से कहीं अधिक कठिन होती हैं। उन्हें नींद की कमी, शरीर की प्राकृतिक लय में गड़बड़ी और अत्यधिक काम के दबाव जैसी समस्याओं से जूझना पड़ता है, जिससे उनकी कार्यक्षमता कम होती है और स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इन जोखिमों को कम करने के लिए, वैज्ञानिक ऐसी विधियां विकसित कर रहे हैं जो अंतरिक्ष यात्रियों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर नजर रख सकें। साथ ही, वे ऐसे उपकरणों और तकनीकों को बेहतर बना रहे हैं जो अंतरिक्ष मिशन के दौरान शुरुआती संकेतों को पहचानकर समय रहते उपचार कर सकें। शुभांशु शुक्ला ने भरी अंतरिक्ष की उड़ान, Axiom-4 मिशन लॉन्च- VIDEO

गुरुत्वाकर्षण की समस्या

अंतरिक्ष यात्रियों के लिए गुरुत्वाकर्षण का अभाव भी एक बड़ी चुनौती होती है। अंतरिक्ष में भारहीनता के कारण उनके शरीर को अलग तरह की परिस्थितियों में काम करना पड़ता है। इसके लिए उन्हें विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है। हालांकि, धरती पर लौटने के बाद उन्हें फिर से सामान्य गुरुत्वाकर्षण के अनुकूल होना पड़ता है, जिससे शरीर पर काफी दबाव पड़ता है। यह समायोजन भी उनके लिए एक बड़ी चुनौती बन जाता है।

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