सऊदी अरब-UAE में होकर रहेगी जंग! अंदर ही अंदर सुलग रहा मिडिल ईस्ट, सऊदी सेना के बयान से मचा हड़कंप

Saudi-UAE Relations: सऊदी अरब ने आरोप लगाया कि UAE ने यमन के अलगाववादी नेता ऐदारौस अल-जुबैदी को अबू धाबी ले जाया, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है।
Saudi Arabia-UAE Conflict
सऊदी अरब-यूएई तनाव (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Saudi Arabia-UAE Conflict: सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच रिश्ते हाल ही में तनावपूर्ण हो गए हैं। सऊदी अरब ने गुरुवार को आरोप लगाया कि यूएई ने यमन के अलगाववादी नेता और सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (STC) के प्रमुख ऐदारौस अल-जुबैदी को यमन से बाहर निकालकर अबू धाबी भेजा। अल-जुबैदी पर देशद्रोह का आरोप है। यूएई की ओर से इस आरोप पर तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।

सऊदी अरब की सेना के बयान में कहा गया कि अल-जुबैदी यमन से नौका द्वारा सोमालिया भाग गए। इसके बाद यूएई अधिकारियों ने उन्हें अमीरात की राजधानी अबू धाबी ले जाने में मदद की। सऊदी गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की ने उस व्यक्ति का नाम भी बताया जिसने अल-जुबैदी को भागने में सहायता दी। इस शख्स को यूएई का मेजर जनरल बताया गया।

यूएई पर लगाए गंभीर आरोप

सऊदी अरब की सेना ने अपने बयान में यह भी उल्लेख किया गया कि ऑपरेशन में इल्यूशिन Il-76 विमान का इस्तेमाल किया गया, जो पहले इथियोपिया, लीबिया और सोमालिया जैसे संघर्ष क्षेत्रों में भी तैनात किया गया था। सऊदी मीडिया ने इस बयान को प्रमुखता से प्रकाशित किया। सऊदी स्वामित्व वाले सैटेलाइट चैनल अल अरबिया ने कथित तौर पर इंटरसेप्ट की गई टेलीफोन कॉल प्रसारित की हैं, जिसमें अल-जुबैदी के भागने की चर्चा हुई। अंग्रेजी अखबार अरब न्यूज ने उनकी फ्रंट-पेज तस्वीर के साथ ‘वांटेड’ शीर्षक प्रकाशित किया।

अल-जुबैदी को बताया देशद्रोही

सरकारी अखबार ने कहा गया कि अलगाववादी नेता का देश में लौटने से इनकार करना उसकी देशद्रोही छवि को पक्का करता है। अखबार  में यह भी आरोप लगाया गया कि अल-जुबैदी ने अपने व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए विदेशी ताकतों के साथ मिलकर दक्षिणी अलगाव को जबरदस्ती थोपने की कोशिश की और इसका मुख्य उद्देश्य सत्ता हासिल करना था।

यमन में युद्ध के चलते अब तक 150,000 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं, जिनमें आम नागरिक और लड़ाके शामिल हैं। यह संघर्ष दुनिया की सबसे गंभीर मानवीय आपदाओं में से एक बन गया है। वहीं, हूती विद्रोहियों ने गाजा पट्टी में इजरायल-हमास युद्ध के संदर्भ में शिपिंग पर हमले भी किए हैं, जिससे वैश्विक व्यापार के एक महत्वपूर्ण मार्ग में बाधा आई है।

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