
विदेश मंत्री एस. जयशंकर (सौजन्य सोशल मीडिया)
नई दिल्ली: एससीओ शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर पाकिस्तान की यात्रा पर जाएंगे। इस बारे में उन्होंने बात की। उन्होंने कहा कि वो पाकिस्तान जा रहे हैं वहां बहुपक्षीय वार्ता होगी। इस तरह से विदेश मंत्री ने अपने पड़ोसी देश को कड़ा संदेश भी देने का काम किया है। ये बातें उन्होंने आईसी सेंटर फॉर गवर्नेंस द्वारा आयोजित गवर्नेंस पर सरदार पटेल व्याख्यान में कही।
एससीओ शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए पाकिस्तान की अपनी आगामी यात्रा पर डॉ. एस जयशंकर ने कहा कि यह यात्रा एक बहुपक्षीय कार्यक्रम के लिए होगी। मैं भारत-पाकिस्तान संबंधों पर चर्चा करने के लिए वहां नहीं जा रहा हूं। विदेश मंत्री ने आगे कहा कि मैं एससीओ समिट का एक अच्छा सदस्य बनने के लिए वहां जा रहा हूं। उन्होंने कहा कि जैसा कि आप जानते हैं, चूंकि मैं एक विनम्र और सभ्य व्यक्ति हूं, इसलिए मैं उसी के अनुसार व्यवहार करूंगा।
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एस जयशंकर ने व्याख्यान में और क्या कहा
आईसी सेंटर फॉर गवर्नेंस द्वारा आयोजित गवर्नेंस पर सरदार पटेल व्याख्यान में विदेश मंत्री ने कहा कि सरदार पटेल संयुक्त राष्ट्र जाने के खिलाफ थे। उन्होंने जूनागढ़, हैदराबाद के मामले में इसका विरोध किया था। वह इस बात को लेकर बहुत स्पष्ट थे कि भारत को अपने मुद्दे को अन्य शक्तियों के सामने नहीं छोड़ना चाहिए। हम सभी के लिए दुख की बात है कि उनकी सावधानी को नजरअंदाज कर दिया गया।
एस जयशंकर के व्याख्यान का एएनआई पर पोस्ट
#WATCH | Delhi: On his upcoming visit to Pakistan to attend the SCO summit, EAM Dr S Jaishankar says, “…It (visit) will be for a multilateral event. I’m not going there to discuss India-Pakistan relations. I’m going there to be a good member of the SCO. But, you know, since I’m… pic.twitter.com/XAK2Hg3qSX — ANI (@ANI) October 5, 2024
पाकिस्तान को कड़ा संदेश
एस जयशंकर ने कहा कि जो जम्मू और कश्मीर प्रश्न के रूप में शुरू हुआ, उसे सुविधाजनक रूप से भारत और पाकिस्तान प्रश्न में बदल दिया गया। इस मामले को संयुक्त राष्ट्र में ले जाने में उनकी अनिच्छा इस विश्वास से आई कि पाकिस्तान के साथ सीधे निपटना बेहतर है। बजाय इसके कि पाकिस्तान को हेरफेर करने की अनुमति देने वाले ढांचे से निपटा जाए।
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किसी भी अन्य पड़ोसी की तरह, भारत पाकिस्तान के साथ अच्छे संबंध रखना चाहेगा, लेकिन सीमा पार आतंकवाद को नजरअंदाज करके नहीं। जैसा कि सरदार पटेल ने दिखाया, यथार्थवाद हमारी नीति का आधार होना चाहिए।






