पुतिन का 'शैडो नेटवर्क' सक्रिय! यूरोप में तबाही मचा रहा वागनर ग्रुप, डिजिटल भर्ती से नाटो देशों में खौफ

Putin Proxy Network: रूस का कुख्यात वागनर ग्रुप अब नए 'शैडो' रूप में सक्रिय है। रिपोर्ट के अनुसार, टेलीग्राम के जरिए युवाओं की भर्ती कर यूरोप में आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा है।
Putin's 'shadow network' is active! The Wagner Group is wreaking havoc in Europe, with digital recruitment raising fears among NATO countries.
पुतिन का 'शैडो नेटवर्क' सक्रिय, फोटो (सो. एआई)
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Wagner Group Europe News: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का कुख्यात प्रॉक्सी संगठन वागनर ग्रुप एक बार फिर दुनिया के लिए सिरदर्द बन गया है। कभी जंग के मैदान में सीधे लड़ने वाली यह निजी सेना अब एक खतरनाक 'शैडो नेटवर्क' में तब्दील हो चुकी है। खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, यूरोप के कई देशों में हाल के महीनों में हुई आगजनी, तोड़फोड़ और संदिग्ध विस्फोटों के पीछे इसी संगठन का हाथ होने का शक गहरा गया है।

प्रिगोझिन के बाद बदला संगठन का स्वरूप

अगस्त 2023 में जब वागनर प्रमुख येवगेनी प्रिगोझिन की विमान हादसे में मौत हुई तो लगा कि संगठन का अंत हो गया है। लेकिन ताज़ा संकेत बताते हैं कि रूस ने इस नेटवर्क को खत्म करने के बजाय इसे नया रूप दे दिया है। अब यह कोई स्वतंत्र निजी सेना नहीं बल्कि सीधे रूसी रक्षा मंत्रालय के नियंत्रण में काम कर रहा है। अफ्रीका में इसे 'अफ्रीका कॉर्प्स' के नाम से जाना जा रहा है जबकि यूरोप में यह एक अदृश्य नेटवर्क की तरह सक्रिय है।

डिजिटल भर्ती और 'टेलीग्राम' का खेल

वागनर ग्रुप ने अब अपनी रणनीति बदल दी है। पहले जहां खुलेआम भर्ती होती थी अब एन्क्रिप्टेड चैट ऐप्स और टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म का सहारा लिया जा रहा है। आर्थिक रूप से कमजोर स्थानीय युवाओं को पैसों का लालच देकर छोटे लेकिन असरदार हमलों के लिए उकसाया जाता है। यूक्रेन समर्थक ठिकानों पर आगजनी और सरकारी संपत्तियों में तोड़फोड़ इस डिजिटल मॉडल का प्रमुख हिस्सा हैं। 2024 में इस तरह की संदिग्ध घटनाओं में भारी उछाल देखा गया है।

नाटो के लिए बढ़ी चुनौती

पश्चिमी खुफिया एजेंसियों के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि ये हमलावर सीधे रूसी एजेंसियों से जुड़े नजर नहीं आते। यह एक 'डिनायबल नेटवर्क' है यानी रूस बड़ी आसानी से इन हमलों में अपनी भूमिका से इनकार कर सकता है। यूक्रेन युद्ध के बाद जब यूरोप ने रूसी एजेंटों को बाहर निकाला तो मॉस्को ने इन बिखरे हुए और नकारे जा सकने वाले नेटवर्कों को अपना हथियार बना लिया।

डर और अविश्वास का माहौल

इन हमलों का मुख्य मकसद केवल भौतिक नुकसान पहुंचाना नहीं बल्कि पश्चिमी देशों के भीतर डर और अविश्वास का माहौल पैदा करना है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह पुतिन की वह रणनीति है जिससे वह पश्चिमी एकता की परीक्षा ले रहे हैं। वागनर का यह नया शैडो मॉडल पारंपरिक युद्ध से कहीं अधिक जटिल और खतरनाक साबित हो रहा है क्योंकि इसमें दुश्मन की पहचान करना और उसे रोकना बेहद मुश्किल है।

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