
रूस ने चल दी मिडिल ईस्ट में नई चाल, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Russian Foreign Policy: अमेरिका की सुरक्षा व्यवस्था पर बढ़ते अविश्वास और मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच रूस ने तेज़ी से अपनी नई विदेश नीति की दिशा बदलनी शुरू कर दी है। लंबे समय तक ईरान को प्रमुख साझेदार मानने के बाद अब मास्को क्षेत्र में अपने प्रभाव का दायरा बढ़ाने में जुट गया है। इसी कड़ी में रूस ने मिस्र और ओमान जैसे दो अहम मुस्लिम देशों की ओर हाथ बढ़ाया है, जिसे उसकी नई मिडिल ईस्ट रणनीति की सबसे महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
रूस के सुरक्षा परिषद के सचिव सर्गेई शॉयगू की मिस्र और ओमान की हालिया उच्चस्तरीय यात्राओं ने यह संकेत साफ कर दिया है कि क्रेमलिन क्षेत्र में अपना पुराना दबदबा लौटाने के लिए अब सक्रिय और आक्रामक कूटनीति अपना रहा है।
शॉयगू का काहिरा दौरा मुख्य रूप से रक्षा और सुरक्षा सहयोग पर केंद्रित रहा। मिस्र के रक्षा मंत्री अब्देल मजीद सक्र के साथ बैठक में रूस ने साफ शब्दों में कहा कि दोनों देशों की सेनाएं आपसी सहयोग को नई ऊंचाई पर ले जाएंगी। इसके लिए नियमित संयुक्त सैन्य अभ्यास कराने और मिस्री सैनिकों को रूसी सैन्य विश्वविद्यालयों में ट्रेनिंग देने का प्रस्ताव रखा गया।
राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी से मुलाकात में शॉयगू ने राष्ट्रपति पुतिन का विशेष संदेश भी सौंपा। इस बैठक का प्रमुख विषय था एल-डबाआ न्यूक्लियर पावर प्लांट। जानकारी के अनुसार यह प्रोजेक्ट समय सीमा के अनुसार आगे बढ़ रहा है। इसके साथ ही स्वेज नहर के पास रूसी इंडस्ट्रियल ज़ोन की प्रगति पर भी दोनों देशों ने गहन चर्चा की, जो आने वाले वर्षों में क्षेत्रीय व्यापार का बड़ा केंद्र बन सकता है।
ओमान को हमेशा से मिडिल ईस्ट की शांत और मध्यस्थ भूमिका निभाने वाले देशों में गिना जाता है। इसी वजह से शॉयगू की मस्कट यात्रा को बेहद रणनीतिक माना जा रहा है। सुल्तान हैथम बिन तारिक से मुलाकात में रूस ने ओमान को एक भरोसेमंद, संतुलित और दीर्घकालिक साझेदार के रूप में देखा है।
मस्कट में हुई वार्ताओं में सुरक्षा, सैन्य सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता पर गहन चर्चा हुई। रूस ने ओमान को कई लचीले प्रस्ताव दिए जिनमें शामिल हैं दोनों देशों की सुरक्षा परिषदों के बीच नियमित समन्वय, समुद्री सहयोग को बढ़ावा, रूसी नौसैनिक जहाजों का मस्कट और सलालाह पोर्ट पर नियमित ठहराव, तथा आतंकवाद विरोधी अभियानों में संयुक्त सहयोग।
इन प्रस्तावों को क्षेत्रीय सुरक्षा और समुद्री मार्गों की स्थिरता के लिए मास्को की नई रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। रूस यह संदेश देना चाहता है कि वह न सिर्फ सैन्य शक्ति के रूप में बल्कि एक स्थिरता प्रदान करने वाले साझेदार के रूप में भी खुद को स्थापित कर रहा है।
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अमेरिका की पश्चिम एशिया नीति पर सवाल बढ़ने के बाद रूस को क्षेत्र में अपनी मौजूदगी मजबूत करने का अवसर मिला है। मिस्र और ओमान के साथ गहराई बढ़ाने से रूस न केवल रणनीतिक लाभ हासिल करेगा बल्कि क्षेत्र में अमेरिकी प्रभाव को संतुलित भी कर पाएगा।






