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पाकिस्तान जनरल के हाथ में अमेरिका-ईरान की कमान; असिम मुनीर बने मुख्य मध्यस्थ, शहबाज केवल जूनियर पार्टनर?
- Written By: अमन उपाध्याय
Pakistan Army Chief Asim Munir: अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता में पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असिम मुनीर की बढ़ती भूमिका ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मचा दी है।

शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Pakistan Army Chief Asim Munir Mediator US Iran: पाकिस्तान की राजनीति और विदेश नीति में एक बार फिर बड़ा शक्ति संतुलन देखने को मिल रहा है। जहां एक ओर देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर होती दिख रही है वहीं दूसरी ओर पाकिस्तानी सेना का प्रभाव ‘रावलपिंडी’ से बढ़कर अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंच गया है।
रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान अब अमेरिका और ईरान के बीच एक अप्रत्याशित मध्यस्थ के रूप में उभरा है और इस पूरी प्रक्रिया की धुरी कोई राजनेता नहीं बल्कि सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असिम मुनीर हैं।
व्हाइट हाउस से तेहरान तक मुनीर का दबदबा
ब्रिटिश अखबार ‘द गार्जियन’ की एक चौंकाने वाली रिपोर्ट के अनुसार, असिम मुनीर दुनिया के उन चुनिंदा लोगों में शामिल हो गए हैं जिनका अमेरिका और ईरान के शीर्ष नेतृत्व के साथ सीधा संपर्क है। रिपोर्ट बताती है कि 18 जून 2025 को असिम मुनीर ने व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की थी।
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यह मुलाकात इसलिए भी असाधारण थी क्योंकि मुनीर किसी भी निर्वाचित राजनीतिक पद पर नहीं थे फिर भी राष्ट्रपति ट्रंप ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की तुलना में मुनीर के साथ संवाद को अधिक महत्व दिया।
रावलपिंडी बना कूटनीति का नया केंद्र
पाकिस्तान की पूर्व राजनयिक मलीहा लोधी के अनुसार, अमेरिका-ईरान वार्ताओं का असली संचालन इस्लामाबाद के संसद भवन के बजाय रावलपिंडी स्थित सेना मुख्यालय से हो रहा है। उन्होंने मुनीर को इस पूरी प्रक्रिया का ‘मुख्य संचालक’ बताया है।
वर्तमान स्थिति ऐसी है कि पाकिस्तान का विदेश मंत्रालय केवल एक ‘जूनियर पार्टनर’ की भूमिका निभा रहा है जबकि सरकार के मंत्री महज सहायक बनकर रह गए हैं। यहां तक कि जब इस्लामाबाद में दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों की बैठक हुई तब भी मुनीर तीसरे पक्ष के रूप में मौजूद रहकर वार्ता को दिशा दे रहे थे।
संवैधानिक संशोधन और असीमित शक्तियां
पाकिस्तान में सेना के बढ़ते प्रभाव को कानूनी जामा पहनाने के लिए नवंबर 2025 में 27वां संवैधानिक संशोधन पारित किया गया। इस संशोधन के तहत ‘चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज’ का एक नया पद बनाया गया जो सीधे तौर पर सेना प्रमुख के पास ही रहेगा। यह पद मुनीर को न केवल थल सेना, बल्कि नौसेना और वायुसेना पर भी पूर्ण नियंत्रण प्रदान करता है।
इसके अलावा, इस संशोधन के जरिए पांच सितारा अधिकारियों को आजीवन कानूनी छूट भी दी गई है, जिससे भ्रष्टाचार और मानवाधिकार उल्लंघन जैसे मुद्दों पर सेना की जवाबदेही खत्म होने की चिंता बढ़ गई है।
यह भी पढ़ें:- बड़ी राहत: ईरान ने खोला स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, लेबनान सीजफायर के बीच जहाजों के लिए रास्ता साफ
लोकतंत्र के लिए बढ़ता खतरा
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सार्वजनिक रूप से मुनीर की सराहना करते हुए उन्हें अमेरिका और ईरान के बीच संदेश पहुंचाने में ‘महत्वपूर्ण’ बताया है। मुनीर हाल ही में तेहरान भी गए ताकि वार्ता के अगले दौर को आगे बढ़ाया जा सके। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह मध्यस्थता सफल होती है तो असिम मुनीर का प्रभाव इतना बढ़ जाएगा कि नागरिक सरकार की स्वायत्तता पूरी तरह समाप्त हो सकती है। सेना का यह बढ़ता हस्तक्षेप पाकिस्तान के लोकतांत्रिक संतुलन के लिए एक बड़ा खतरा माना जा रहा है।
Pakistan army chief asim munir mediator us iran diplomacy
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