

Houthi Red Sea Blockade Oil Saudi Oil Crisis: मिडिल ईस्ट में जारी सैन्य संघर्ष अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है, जहां से वैश्विक अर्थव्यवस्था के चरमराने का खतरा पैदा हो गया है। यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सोमवार को लाल सागर में सऊदी अरब के जहाजों की पूर्ण नाकेबंदी करने का बड़ा ऐलान किया है।
हूतियों के इस कदम ने न केवल युद्ध का एक नया मोर्चा खोल दिया है, बल्कि दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्गों में से एक 'बाब अल-मंदेब' जलडमरूमध्य पर संकट के बादल गहरा दिए हैं।
हूती सेना के प्रवक्ता याह्या सरी ने टीवी पर बताया कि वे सऊदी अरब के किसी भी जहाज को बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य से गुजरने नहीं देंगे। बता दें कि यह जलमार्ग लाल सागर का दक्षिणी प्रवेश द्वार है और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
वर्तमान में होर्मुज पर अमेरिका और ईरान की आपसी नाकेबंदी के कारण वैश्विक तेल सप्लाई पहले ही प्रभावित है। ऐसे में सऊदी अरब अपने कच्चे तेल के निर्यात के लिए वैकल्पिक मार्ग के रूप में लाल सागर का उपयोग कर रहा था, जिसे अब हूतियों ने निशाना बनाने की धमकी दी है।
यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका और ईरान के बीच सीधी जंग और भी हिंसक हो गई है। सोमवार और मंगलवार की दरम्यानी रात अमेरिकी वायुसेना ने ईरान पर लगातार 10वीं रात भीषण बमबारी की।
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने स्वीकार किया है कि पिछले दो हफ्तों में संघर्ष के दौरान घायल होने वाले अमेरिकी सैनिकों की संख्या बढ़कर लगभग 100 हो गई है, जबकि शुक्रवार से अब तक तीन सैनिकों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए ईरान को आगाह किया है कि हर एक अमेरिकी सैनिक की जान के बदले उसे कई गुना ज्यादा कीमत चुकानी होगी।
हूतियों की इस एंट्री ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में खलबली मचा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लाल सागर में जहाजों की आवाजाही रुकती है, तो कच्चे तेल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकती हैं। यह न केवल अमेरिका और खाड़ी देशों, बल्कि भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों के लिए भी बड़ी चिंता का विषय है।
जानकारों के अनुसार, हूतियों की यह रणनीति सीधे तौर पर तेहरान के हितों को साधने के लिए तैयार की गई है ताकि अमेरिका और उसके सहयोगियों पर आर्थिक दबाव बनाया जा सके।
मिडिल ईस्ट का यह संघर्ष अब केवल दो देशों तक सीमित नहीं रहा है। फारस की खाड़ी के अरब देशों और कुवैत में महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों को भारी नुकसान पहुंचा है। होर्मुज से लेकर लाल सागर तक फैली इस घेराबंदी ने समुद्री व्यापार को लगभग ठप कर दिया है। यदि कूटनीतिक स्तर पर जल्द ही कोई समाधान नहीं निकला, तो यह क्षेत्रीय तनाव एक पूर्ण वैश्विक आर्थिक संकट का रूप ले सकता है।