शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर, फोटो (सो. सोशल मीडिया) 
विदेश

एक तरफ अमेरिका का संदेश, दूसरी तरफ कर्ज की गुहार; क्या पाकिस्तान का डबल गेम अब पड़ेगा भारी?

Pakistan Diplomacy: आर्थिक बदहाली से जूझ रहा पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की कोशिश कर रहा है लेकिन इस्लामाबाद में हुई वार्ता के बाद शहबाज शरीफ की लागातार अंतरराष्ट्रीय किरकिरी हो रही है।

अमन उपाध्याय

Pakistan Diplomacy Shehbaz Sharif Gulf Aid: पाकिस्तान इस समय एक अजीबोगरीब कूटनीतिक और आर्थिक स्थिति से गुजर रहा है। एक तरफ वह दुनिया के सामने अमेरिका और ईरान जैसे कड़े प्रतिद्वंद्वी देशों के बीच मध्यस्थ (Mediator) बनकर अपनी छवि सुधारने की कोशिश कर रहा है, तो दूसरी तरफ घरेलू स्तर पर वह 'होटल बिल' चुकाने के विवादों में घिर गया है।

मध्यस्थता के पीछे का आर्थिक गणित

पाकिस्तान की इस मध्यस्थता के पीछे केवल शांति की चाह नहीं, बल्कि गहरी आर्थिक मजबूरी छिपी है। दरअसल, अमेरिका द्वारा ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों के कारण पाकिस्तान वहां से सस्ता तेल नहीं खरीद पा रहा है। पाकिस्तान को उम्मीद है कि यदि वह सफल मध्यस्थ बनता है तो अमेरिका उसे ईरान से तेल खरीदने में छूट दे सकता है। वर्तमान में होर्मुज संकट के कारण तेल की कीमतें बढ़ने का खतरा है जिससे पाकिस्तान में महंगाई और अधिक बढ़ सकती है।

कर्ज चुकाने का दबाव और विदेशी दौरे

पाकिस्तान की घबराहट की एक बड़ी वजह अप्रैल के अंत तक संयुक्त अरब अमीरात (UAE) को लौटाया जाने वाला 3.5 अरब डॉलर का कर्ज भी है। इसी आर्थिक दबाव के बीच प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ सऊदी अरब, कतर और तुर्किए के दौरे पर हैं ताकि देश की डूबती अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए कुछ वित्तीय मदद मिल सके। दूसरी ओर, पाकिस्तान के आर्मी चीफ जनरल असीम मुनीर भी दूसरे दौर की वार्ता की जमीन तैयार करने के लिए ईरान पहुंचे हुए हैं।

कूटनीति के बीच 'होटल बिल' का विवाद

हाल ही में इस्लामाबाद के लग्जरी सेरेना होटल में अमेरिका और ईरान के बीच उच्च स्तरीय वार्ता आयोजित की गई थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 10 से 12 अप्रैल के बीच हुई इस बैठक के बाद यह खबर उड़ी कि पाकिस्तान सरकार होटल का बिल चुकाने में असमर्थ रही। हालांकि, होटल प्रबंधन ने सफाई देते हुए इसे 'कॉम्प्लिमेंट्री' (मुफ्त) बताया है लेकिन सोशल मीडिया पर पाकिस्तान की जमकर खिल्ली उड़ाई जा रही है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जो देश अपने मेहमानों के रहने का खर्च नहीं उठा पा रहा वह वैश्विक शांति कैसे स्थापित करेगा?

दोहरी नीति का जोखिम

जानकारों का मानना है कि पाकिस्तान की यह 'दोहरी नीति' उस पर भारी भी पड़ सकती है। एक तरफ वह अमेरिका का संदेश ईरान तक पहुंचा रहा है तो दूसरी तरफ खाड़ी देशों से मदद की गुहार लगा रहा है। यदि वार्ता विफल होती है और पश्चिम एशिया में संघर्ष बढ़ता है, तो शिपिंग रूट्स बंद होने से पाकिस्तान की ऊर्जा आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित होगी। अब सबकी नजरें दूसरे दौर की वार्ता पर टिकी हैं सिर्फ यह देखने के लिए नहीं कि शांति होगी या नहीं बल्कि यह भी कि अगले दौर का 'चेक' कौन काटेगा?

सहारनपुर मस्जिद पर गरमाई सियासत, मायावती ने बुलडोजर कार्रवाई रोकने की मांग की, कहा- तुरंत रोके कार्रवाई

Teacher’s Day पर PM मोदी की शिक्षकों संग खास बातचीत, पब्लिक स्पीकिंग से लेकर बच्चों के टैलेंट तक पर हुई चर्चा

Operation Chakra 6: डिजिटल अरेस्ट का खौफनाक खेल! 3 महीने बंधक बनाकर ऐंठे 42.36 करोड़, CBI ने दबोचे 3 एजेंट

शिक्षक दिवस पर डॉ. राधाकृष्णन को नमन, योगी-गडकरी समेत कई नेताओं ने दी शिक्षकों को शुभकामनाएं

केन्या ने टाटा केमिकल्स से तोड़ा नाता, 100 साल पुराना समझौता रद्द, शेयर बाजार पर असर, कहा- किसी के गुलाम नहीं