नेपाल में बड़ा राजनीतिक भूचाल: जेन-जी आंदोलन मामले में पूर्व पीएम केपी शर्मा ओली को समन

KP Sharma Oli Summoned: नेपाल के जांच आयोग ने 2025 के जेन-जी आंदोलन मामले में पूर्व पीएम केपी शर्मा ओली को पूछताछ के लिए समन भेजने की तैयारी की है। सुरक्षा प्रमुखों के बया के बाद ओली पर शिकंजा कसा।
Nepal Crisis: Former PM KP Sharma Oli Summoned Over Gen-Z Protest Investigation
नेपाल के पूर्व पीएम केपी शर्मा ओली (सोर्स-सोशल मीडिया)
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Nepal Gen-Z Protest Inquiry 2026: नेपाल की राजनीति में उस वक्त भारी हलचल मच गई जब पिछले साल हुए ऐतिहासिक 'जेन-जी' आंदोलन की जांच कर रहे आयोग ने पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को पूछताछ के लिए बुलाने का फैसला किया। सितंबर 2025 में हुए इस युवा विद्रोह के कारण ओली को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था, जिसमें दर्जनों प्रदर्शनकारियों की जान गई थी। आयोग के अध्यक्ष और पूर्व न्यायाधीश गौरीबहादुर कार्की ने पुष्टि की है कि तत्कालीन सरकार द्वारा किए गए बल प्रयोग की सच्चाई जानने के लिए ओली को औपचारिक पत्र भेजा जा रहा है। यह जांच नेपाल की अंतरिम सरकार द्वारा जवाबदेही तय करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

केपी शर्मा ओली को औपचारिक समन

जांच आयोग के अध्यक्ष गौरीबहादुर कार्की ने सिंहदरबार में प्रधानमंत्री सुशीला कार्की से मुलाकात के बाद घोषणा की कि ओली को बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया जा रहा है। आयोग यह स्पष्ट करना चाहता है कि 8 और 9 सितंबर को प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने का आदेश किस स्तर पर दिया गया था। हालांकि, ओली ने सार्वजनिक रूप से इस आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए पेश होने से इनकार करने के संकेत दिए हैं।

पूर्व गृह मंत्री का बयान दर्ज

इस मामले में पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक पहले ही आयोग के सामने पेश होकर अपना विस्तृत बयान दर्ज करा चुके हैं। लेखक ने अपनी गवाही में हिंसा को एक 'सोची-समझी साजिश' करार दिया है, जिसके बाद आयोग ने उन पर लगे यात्रा प्रतिबंधों को हटा दिया है। पूर्व गृह मंत्री के बयानों और अन्य दस्तावेजों की समीक्षा के बाद अब आयोग की सुई सीधे तत्कालीन प्रधानमंत्री की भूमिका की ओर घूम गई है।

सुरक्षा प्रमुखों से लंबी पूछताछ

आयोग ने ओली को बुलाने से पहले सुरक्षा तंत्र के लगभग सभी शीर्ष अधिकारियों से पूछताछ पूरी कर ली है। इसमें तत्कालीन मुख्य सचिव, गृह सचिव, सेना प्रमुख अशोकराज सिग्देल और नेपाल पुलिस के आईजीपी शामिल हैं। इन अधिकारियों के बयानों से यह पता लगाने की कोशिश की गई है कि क्या प्रदर्शन को दबाने के लिए 'अनुचित बल' का प्रयोग करने के निर्देश सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय से प्राप्त हुए थे।

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जांच रिपोर्ट की समय सीमा

गौरीबहादुर कार्की के नेतृत्व वाला यह तीन सदस्यीय आयोग 21 जनवरी 2026 तक अपनी अंतिम रिपोर्ट सरकार को सौंपने की तैयारी में है। आयोग के पास किसी भी व्यक्ति को तलब करने और असहयोग करने पर कानूनी कार्रवाई की सिफारिश करने की शक्तियां हैं। यदि ओली उपस्थित नहीं होते हैं, तो आयोग कानून के अनुसार उपलब्ध विकल्पों पर विचार करेगा, जिससे नेपाल में एक नया संवैधानिक संकट पैदा हो सकता है।

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