युवाओं को न भूलें वरना... नेपाल में फिर सुलग सकती है विद्रोह की आग, पीएम सुशीला कार्की ने जारी की चेतावनी

Gen-Z Protest Nepal: नेपाल में 5 मार्च को होने वाले आम चुनाव से पहले अंतरिम पीएम सुशीला कार्की ने 'विद्रोह पार्ट-2' की कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने युवाओं के असंतोष को बड़ी बगावत का संकेत बताया है।
Don't forget the youth, or else... Nepal could see another uprising, PM Sushila Karki issues warning
नेपाल की पीएम सुशीला कार्की ने जारी की चेतावनी, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
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Nepal Elections News:  नेपाल में आम चुनाव के लिए अब मात्र 15 दिन का समय शेष रह गया है लेकिन सीमा पार राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरमाया हुआ है। नेपाल की अंतरिम प्रधानमंत्री सुशीला कार्की ने देश के भविष्य को लेकर एक गंभीर चेतावनी जारी की है। काठमांडू के नेपाली आर्मी पवेलियन में 76वें लोकतंत्र दिवस के अवसर पर बोलते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि युवाओं की समस्याओं और उनकी नाराजगी का तत्काल समाधान नहीं खोजा गया तो देश में एक और बड़ी बगावत यानी 'विद्रोह पार्ट-2' देखने को मिल सकता है।

सिस्टम की नाकामियों पर पीएम का कड़ा प्रहार

पीएम सुशीला कार्की ने अपने संबोधन में देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था की कमियों को उजागर किया। उन्होंने आत्म-मंथन करते हुए कहा कि नेपाल ने संविधान में तो बराबरी लिख दी लेकिन समाज के भीतर गैर-बराबरी और भेदभाव को आज भी बचाकर रखा गया है। कार्की के अनुसार, सत्ता और संसाधनों पर कुछ खास लोगों के एकाधिकार ने आम जनता, विशेषकर युवाओं का भरोसा सिस्टम से खत्म कर दिया है जिससे बगावत की भावना प्रबल हो रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र सिर्फ एक प्रक्रिया नहीं बल्कि एक 'परिणामोन्मुखी प्रणाली' होनी चाहिए जिसे नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए।

Gen-Z क्रांति और 5 मार्च का चुनाव

नेपाल में 5 मार्च को हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के चुनाव होने हैं। यह चुनाव पिछले साल हुए उस हिंसक 'Gen-Z' आंदोलन के बाद पहला बड़ा चुनाव है  जिसने केपी शर्मा ओली की सरकार को सत्ता से उखाड़ फेंका था। पिछले साल 12 सितंबर को अंतरिम पीएम का पद संभालने वाली कार्की ने याद दिलाया कि उस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और भेदभाव को खत्म करना था। उन्होंने सरकार को चेतावनी दी कि युवाओं में ऊर्जा और नैतिक गुस्सा है जिसे नजरअंदाज करना देश की तरक्की को रोकना होगा।

राजशाही की वापसी और गहराता संकट

इस राजनीतिक अस्थिरता के बीच पूर्व राजा ज्ञानेंद्र ने भी अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से राजशाही की बहाली की मांग करते हुए कहा कि नेपाल वर्तमान में एक 'अजीब संकट' में फंसा हुआ है। ज्ञानेंद्र ने चेतावनी दी कि यदि राष्ट्रीय संकट को सुलझाए बिना चुनाव कराए जाते हैं तो इससे देश में और अधिक झगड़े और अस्थिरता पैदा हो सकती है।

वहीं दूसरी ओर, राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने लोगों से 1950 की उस क्रांति को याद रखने की अपील की जिसने राणा शासन के 104 साल पुराने खानदानी शासन को खत्म कर लोकतंत्र की नींव रखी थी। वर्तमान में नेपाल एक तरफ राजशाही समर्थकों के बढ़ते स्वर और दूसरी तरफ युवाओं की अधूरी आकांक्षाओं के बीच खड़ा है।

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