
क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, डोनाल्ड ट्रंप (सोर्स- सोशल मीडिया)
Mohammed Bin salman US Visit: सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) इन दिनों अमेरिका के दौरे पर हैं। मंगलवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उनके सम्मान में व्हाइट हाउस में एक भव्य डिनर आयोजित किया, जिसमें अमेरिका के बड़े उद्योगपतियों के साथ क्रिस्टियानो रोनाल्डो जैसी बड़ी हस्तियां भी शामिल हुईं। इस दौरान ट्रंप ने सऊदी अरब को अमेरिका का मेजर नॉन-नाटो अलाय दर्जा दिया।
ट्रंप ने यह सम्मान देते हुए सऊदी अरब और खासकर क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की जमकर तारीफ की, जबकि सलमान पर कई गंभीर आरोप हैं। इनमें अपने खुद के भाई का तख्तापलट करने से लेकर यमन में सैकड़ों लोगों की हत्या जैसे मामले शामिल हैं। यहां तक कि उनके आलोचक और खुद अमेरिकी मीडिया ने उन्हें कई बार “सऊदी का कसाई” तक कहा है।
मोहम्मद बिन सलमान कभी भी सऊदी के क्राउन प्रिंस बनने की रेस में नहीं थे। 2017 से पहले मुहम्मद बिन नाएफ सऊदी के क्राउन प्रिंस थे, जो सऊदी के राजा शाह सलमान बिन अब्दुलअजीज अल सऊद के भतीजे और सलमान के भाई थे। लेकिन जब 2015 में शाह अब्दुलअजीज ने हाथों में परिवार और देश की सत्ता ली, तो उन्होंने अपने भतीजे को हटाकर अपने बेटे को राजकुमार बना दिया। उस समय इस कदम का विरोध भी हुआ था। माना जाता है कि ऐसा करने के लिए सलमान ने अपने पिता को मजबूर किया था और अपने भाई को सुनियोजित तरीके से अपने रास्ते से हटा दिया था।
सलमान के खिलाफ सबसे प्रमुख विवाद 2018 में पत्रकार जमाल खशोगी की हत्या से जुड़ा है। इस्तांबुल स्थित सऊदी कांसुलेट में खशोगी का बेरहमी से कत्ल किया गया। अमेरिकी और यूरोपीय खुफिया रिपोर्टों ने इस हत्या को सऊदी नेतृत्व के उच्चतम स्तर से जोड़कर देखा। इस घटना ने उन्हें वैश्विक स्तर पर निर्दयी और क्रूर नेता के रूप में पेश किया। दिलचस्प बात ये है कि उस समय भी ट्रंप ही राष्ट्रपति थे और उन्होंने या उनकी सरकार ने सऊदी प्रिंस को लेकर कोई भी बयान नहीं दिया था। हालांकि जो बाइडेन ने राष्ट्रपति बनते ही सलमान के खिलाफ कार्रवाई की बात कही थी।
इसके अलावा, सऊदी अरब का यमन युद्ध भी उनके विवादास्पद निर्णयों में शामिल है। 2015 से यमन में हौथी विद्रोहियों के खिलाफ सऊदी नेतृत्व वाले अभियान में सैकड़ों नागरिक मारे गए और देश में व्यापक मानवीय संकट पैदा हुआ। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन इस युद्ध को युद्ध अपराधों और नरसंहार जैसी हिंसा से जोड़कर देखते हैं।
सत्तारूढ़ होने के बावजूद, मोहम्मद बिन सलमान ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राजनीतिक विरोधियों को दबाने के कठोर उपाय जारी रखे। कई पत्रकार, राजनेता और सामाजिक कार्यकर्ता नजरबंद या गिरफ्तार किए गए। कुछ मामलों में उन्हें यातना और धमकियों का सामना करना पड़ा।
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हालांकि उन्होंने महिलाओं के अधिकारों में सुधार और आर्थिक विकास के कुछ कदम उठाए, परंतु उनकी हिंसक नीतियों और राजनीतिक विरोधियों के प्रति कठोर रुख के कारण उन्हें “सऊदी का कसाई” की उपाधि दी गई। यह नाम उनके शासन की कट्टर और विवादास्पद छवि का प्रतीक बन गया है।






