ट्रंप ने सऊदी को नॉन-NATO एलाय का दर्जा दिया, सिर्फ 20 देशों के पास ये सम्मान, Pak का भी नाम शामिल

Mohammed bin Salman US Visit: अमेरिका का मेजर नॉन-नाटो अलाई दर्जा सऊदी को उन्नत हथियार, तेज सैन्य सहयोग और बड़े निवेश सौदों की सुविधा देता है, जबकि पाकिस्तान 2004 से यह रणनीतिक लाभ उठाता आ रहा है।
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ट्रंप ने सऊदी को नॉन-NATO एलाय का दर्जा दिया (सोर्स- सोशल मीडिया)
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US-Saudi Defence Deal: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार व्हाइट हाउस में हुए भव्य डिनर के दौरान सऊदी अरब को मेजर नॉन-नाटो अलाई (MNNA) का दर्जा देने ऐलान किया। यह फैसला सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के साथ हुई बैठक के बाद आया, जिसे अमेरिका-सऊदी संबंधों की नई ऊंचाई माना जा रहा है। दिलचस्प बात यह है कि पाकिस्तान को भी यह स्टेटस 2004 से मिला हुआ है।

नाटो अमेरिका का सबसे करीबी सुरक्षा संगठन है, जिसमें 32 देश एक-दूसरे की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं। लेकिन अमेरिका के कई महत्वपूर्ण साझेदार ऐसे भी हैं जो नाटो का हिस्सा नहीं हैं। इन्हीं रणनीतिक मित्रों के लिए 1987 में एक अमेरिकी कानून के तहत मेजर नॉन-नाटो अलाई का दर्जा बनाया गया, जिसे 1996 में और मजबूत किया गया।

MNNA के फायदे?

MNNA कोई सैन्य गठबंधन या सुरक्षा गारंटी नहीं है, लेकिन यह दर्जा मिलने पर देश को अमेरिकी मिलिट्री, टेक्नोलॉजी और फाइनेंशियल सहयोग में खास सुविधाएँ मिलती हैं, जो आम देशों को नहीं मिलतीं। फिलहाल 20 देशों को यह दर्जा है, जिनमें ऑस्ट्रेलिया, जापान, इजरायल, मिस्र, कतर, पाकिस्तान, दक्षिण कोरिया, ब्राजील, फिलीपींस, बहरीन और अब सऊदी अरब शामिल हैं।

सऊदी को दर्जा क्यों मिला?

ट्रंप ने सऊदी को MNNA बनाते हुए कहा कि यह कदम दोनों देशों की मिलिट्री साझेदारी को नई दिशा देगा। यह घोषणा वाइट हाउस के ईस्ट रूम में हुई ब्लैक-टाई डिनर के दौरान की गई, जहाँ दोनों देशों ने एक स्ट्रैटेजिक डिफेंस एग्रीमेंट पर भी हस्ताक्षर किए।

सऊदी को MNNA बनाने का मुख्य कारण:

रणनीतिक महत्व: मिडिल ईस्ट में सऊदी अमेरिका का सबसे बड़ा साझेदार है। ईरान के बढ़ते प्रभाव को रोकने में यह सहयोग अहम माना जा रहा है।

आर्थिक वादे: सऊदी प्रिंस ने अमेरिका में निवेश को 600 अरब डॉलर से बढ़ाकर 1 ट्रिलियन डॉलर करने की घोषणा की।

हथियारों व टेक्नोलॉजी की डील: बदले में अमेरिका सऊदी को F-35 जेट्स, आधुनिक टैंक, AI टेक्नोलॉजी और नागरिक परमाणु तकनीक देने पर सहमत हुआ।

ट्रंप की नीतियाँ पहले से ही सऊदी-हित वाली रही हैं 2017 की उनकी पहली विदेश यात्रा भी सऊदी ही थी। इसी कारण यह दर्जा सऊदी को अमेरिका के सबसे महत्वपूर्ण साझेदारों की कतार में ला खड़ा करता है।

पाकिस्तान को 2004 में मिला दर्जा

पाकिस्तान को 2004 में 9/11 के बाद अमेरिकी सहयोग के बदले MNNA बनाया गया। पाक ने अमेरिका को एयरबेस दिए और अल-कायदा के अनेक सदस्यों को पकड़ा। हालांकि बाद में तालिबान और हक्कानी नेटवर्क को शरण देने के आरोपों से रिश्तों में तनाव बढ़ा। 2011 में ओसामा बिन लादेन के पाकिस्तान में मारे जाने के बाद अविश्वास और बढ़ गया। अमेरिकी कांग्रेस में कई बार यह दर्जा हटाने की मांग भी उठ चुकी है। फिर भी MNNA होने से पाकिस्तान को F-16 जेट्स, सैन्य मदद और प्रशिक्षण जैसी सुविधाएँ मिलती रहीं। 2025 तक यह दर्जा बरकरार है, लेकिन सऊदी पर बढ़ते अमेरिकी फोकस से पाकिस्तान की चिंता स्वाभाविक है।

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