इजरायल का साथ दोगे तो...खामेनेई ने अमेरिका को बताया कैसे होगी दोस्ती, ट्रंप के सामने धर्म संकट

Iran-US Nuclear Talks: ईरान और अमेरिका के रिश्ते तनावपूर्ण रहे हैं, ईरान का कहना है कि संबंध समानता और सम्मान पर आधारित होने चाहिए, लेकिन अमेरिका मध्य-पूर्व में सैन्य दखलअंदाजी करता है।
इजरायल का साथ दोगे तो...खामेनेई ने अमेरिका को बताया कैसे होगी दोस्ती, ट्रंप के सामने धर्म संकट
ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Ayatollah Khamenei on Iran-US Relations: ईरान और अमेरिका के रिश्ते लंबे समय से तनावपूर्ण रहे हैं, और ईरान बार-बार यह कहता आया है कि वह अमेरिका के साथ संबंधों में कोई आपत्ति नहीं रखता, लेकिन यह शर्त समानता और सम्मान की होनी चाहिए। उनके लिए यह राष्ट्रीय सम्मान का सवाल है। इसी बीच ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने अमेरिका के साथ संबंधों को लेकर एक बयान जारी किया है।

खामेनेई ने हाल ही में कहा कि जब तक अमेरिका इजरायल का समर्थन करेगा, मिडिल-ईस्ट में दखलअंदाजी करेगा और अपने सैन्य ठिकाने बनाए रखेगा, तब तक ईरान और अमेरिका के बीच दोस्ती संभव नहीं हो सकती। उन्होंने स्पष्ट कहा कि ईरान और अमेरिका के बीच दोस्ती तभी संभव है जब वो मिडिल-ईस्ट में अपनी दखलअंदाजी बंद कर देगा।

इजरायल से रिश्ते खत्म करना होगा: खामेनेई

यह बयान ऐसे समय आया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान पर दबाव बना रहे थे और बातचीत का प्रस्ताव भी दे रहे थे। एक हाथ में दोस्ती का प्रस्ताव और दूसरे में सख्ती। खामेनेई ने साफ किया कि ईरान अब आधे-अधूरे भरोसे पर कोई समझौता नहीं करेगा। उन्होंने प्रमुख शर्त रखी कि जब तक अमेरिका इजरायल के साथ अपना गठजोड़ नहीं छोड़ता, तब तक दोस्ती की कोई संभावना नहीं है। इससे यह साफ है कि ईरान के लिए अमेरिका और इजरायल की मित्रता सबसे बड़ी रुकावट है।

अक्टूबर में ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका ईरान के साथ दोस्ती और सहयोग के लिए तैयार है, जब तेहरान इसके लिए तैयार हो। लेकिन सवाल यह है कि जब अमेरिका एक ओर दबाव बना रहा है और प्रतिबंध लागू कर रहा है, तो ईरान इसे गंभीरता से कैसे ले सकता है? खामेनेई का बयान इस असमंजस को और बढ़ा देता है।

परमाणु वार्ता बीच में अटकी

दोनों देशों के बीच परमाणु वार्ता के पांच दौर हो चुके हैं, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपना यूरेनियम संवर्धन पूरी तरह से रोक दे, जबकि ईरान इसे अपने संप्रभु अधिकारों का हिस्सा मानता है। ट्रंप के लिए समस्या यह है कि वह एक ओर सख्ती दिखा रहे हैं, तो दूसरी ओर ईरान से तेल आपूर्ति की आवश्यकता भी महसूस करते हैं।

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