

Kyoto University AI Monk Research: जापान के वैज्ञानिकों ने आधुनिक तकनीक और आध्यात्मिकता का एक अनूठा संगम पेश करते हुए एक 'संत रोबोट' बनाया है। क्योटो यूनिवर्सिटी AI मोंक रिसर्च के तहत विकसित इस रोबोट का नाम 'बुद्धारॉइड' रखा गया है जो दिखने में इंसानों जैसा है। यह रोबोट न केवल बौद्ध धर्म के कठिन ग्रंथों को समझता है बल्कि लोगों की मानसिक उलझनों को सुलझाने में भी मदद करता है। भविष्य में यह मशीनी भिक्षु मंदिरों में होने वाले पारंपरिक विधि-विधानों में मानव भिक्षुओं की कमी को पूरा कर सकता है।
जापान की क्योटो यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने इस विशेष ह्यूमनॉइड रोबोट 'बुद्धारॉइड' को कड़ी मेहनत के बाद विकसित किया है। इसे बनाने वाले प्रोफेसर सेइजी कुमागई का मानना है कि यह रोबोट धार्मिक स्थलों पर अपनी उपस्थिति दर्ज करा सकता है। यह रोबोट केवल आवाज ही नहीं निकालता बल्कि धार्मिक गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लेने की क्षमता भी रखता है।
बुद्धारॉइड को बौद्ध धर्मग्रंथों के सबसे कठिन और गूढ़ हिस्सों की गहराई से समझ विकसित करने के लिए विशेष ट्रेनिंग दी गई है। यूनिवर्सिटी के अनुसार यह रोबोट उन संवेदनशील सवालों के जवाब भी दे सकता है जिन्हें लोग इंसानों से पूछने में घबराते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य धर्म के प्रसार के साथ-साथ लोगों को मानसिक शांति प्रदान करना और उनकी आध्यात्मिक यात्रा में मदद करना है।
प्रोफेसर कुमागई ने चीन में बने 'यूनिट्री जी1' (Unitree G1) नामक ह्यूमनॉइड रोबोट में अपना नया AI मॉडल इंस्टॉल किया है। इस मॉडल का नाम 'बुद्धबॉटप्लस' (BuddhaBotPlus) है जो ओपन AI और अन्य उन्नत मॉडलों की तकनीक पर आधारित है। मीडिया के सामने प्रदर्शन के दौरान इस रोबोट ने बिना चेहरे के और साधारण ग्रे रंग के वस्त्र पहनकर अपनी क्षमताओं को दिखाया।
एक कार्यक्रम के दौरान बुद्धारॉइड ने अपने दस्ताने पहने हाथों को प्रार्थना की मुद्रा में जोड़ा और पत्रकारों के सामने चलकर दिखाया। जब एक पत्रकार ने अपनी चिंताओं के बारे में पूछा तो रोबोट ने शांत और गहरी आवाज में उसे जल्दबाजी न करने की सलाह दी। रोबोट ने कहा कि बौद्ध धर्म सिखाता है कि अपने विचारों के पीछे नहीं भागना चाहिए बल्कि मन को शांत रखना चाहिए।
जापान में मानव भिक्षुओं की लगातार हो रही कमी को देखते हुए यह AI रोबोट एक क्रांतिकारी कदम साबित हो सकता है। यूनिवर्सिटी का कहना है कि भविष्य में ये रोबोट उन धार्मिक अनुष्ठानों को भी निभा सकते हैं जो अब तक केवल इंसान करते थे। यह तकनीक दर्शाती है कि कैसे भविष्य में मशीनों और धर्म के बीच का अंतर धीरे-धीरे कम होता चला जाएगा।
बुद्धारॉइड से पहले प्रोफेसर कुमागई ने 'बुद्धा बॉट' और 'कैटेचिज्म बॉट' जैसे धार्मिक चैटबॉट भी विभिन्न कंपनियों के सहयोग से बनाए थे। यह नया रोबोट उन्हीं प्रयोगों का एक उन्नत और शारीरिक रूप है जो अब मंदिरों में साक्षात मौजूद रह सकता है। जापान का यह प्रयोग पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बना हुआ है क्योंकि यह तकनीक के जरिए शांति का मार्ग दिखा रहा है।