दिल्ली से आधी आबादी वाला देश इजराइल कैसे बना सबसे ज्यादा ताकतवर? जानिए इस पॉवर के पीछे का राज

Strategic Defense MoU: PM मोदी की इजराइल यात्रा के दौरान बड़े सुरक्षा समझौते पर हस्ताक्षर होंगे जिससे भारत की सैन्य शक्ति बढ़ेगी और इजराइल की रक्षा तकनीक व खुफिया एजेंसी मोसाद की ताकत दुनिया को दिखेगी।
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इजराइल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू और पीएम नरेंद्र मोदी (सोर्स- सोशल मीडिया)
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India Israel Strategic Security Agreement: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 9 सालों के बाद दूसरी बार इजराइल के दो दिवसीय महत्वपूर्ण दौरे पर गए हैं जिससे द्विपक्षीय संबंध मजबूत होंगे। इस राजकीय यात्रा के दौरान भारत और इजराइल के बीच एक बड़े सुरक्षा समझौते के नए एमओयू (MoU) पर हस्ताक्षर होने की पूरी उम्मीद है। भारत इजराइल सामरिक सुरक्षा समझौता के तहत संवेदनशील टेक्नोलॉजी शेयरिंग और हथियारों के संयुक्त उत्पादन पर विशेष रूप से जोर दिया जाएगा। पीएम मोदी इजराइली संसद 'नेसेट' को संबोधित करने वाले भारत के पहले प्रधानमंत्री बनेंगे जो दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी में नया मील का पत्थर होगा।

इजराइल की सैन्य शक्ति

दिल्ली की तुलना में आधी आबादी वाला इजराइल आज दुनिया का सबसे शक्तिशाली सैन्य देश माना जाता है जिसके दुश्मन उससे हमेशा थर्राते हैं। वहां की सेना की ताकत और तकनीक उसे वैश्विक स्तर पर एक सुपरपावर बनाती है जो भारत के लिए रक्षा क्षेत्र में बहुत बड़ा सहयोगी है। विशेषज्ञों के अनुसार इजराइल की सफलता के पीछे पांच मुख्य कारण हैं जिनमें उसकी खुफिया एजेंसी और रिसर्च पर होने वाला भारी खर्च शामिल है।

मोसाद का सुरक्षा कवच

इजराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद को दुनिया की सबसे प्रभावी जासूसी एजेंसी माना जाता है जो इजराइल के बॉर्डर से बाहर भी गुप्त ऑपरेशन करती है। मोसाद जासूसी करने, आतंकवादी गतिविधियां रोकने और रणनीतिक खुफिया जानकारी इकट्ठा करने में इतनी माहिर है कि वह हमलों को होने से पहले ही रोक देती है। इसे इजराइल की प्रोएक्टिव सुरक्षा रणनीति कहा जाता है जिसकी वजह से इजराइल प्रतिक्रिया देने के बजाय खतरों को शुरुआत में ही बेअसर कर देता है।

बेजोड़ रक्षा तकनीक

इजराइल अपनी उन्नत रक्षा तकनीक जैसे 'आयरन डोम' मिसाइल रक्षा प्रणाली के लिए दुनिया भर में मशहूर है जो रॉकेटों को हवा में ही मार गिराती है। राफेल एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम्स और एल्बिट जैसी इजराइली कंपनियां आधुनिक ड्रोन, रडार सिस्टम और साइबर रक्षा उपकरण बनाने में विश्व स्तर पर अग्रणी हैं। इजराइल न केवल इन हथियारों का उपयोग अपनी सुरक्षा के लिए करता है बल्कि इनका बड़े पैमाने पर निर्यात करके अपनी अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करता है।

रिसर्च और डवलपमेंट

इजराइल दुनिया में रिसर्च और डेवलपमेंट यानी आरएंडडी पर अपनी कुल जीडीपी का सबसे अधिक 6 प्रतिशत हिस्सा खर्च करने वाला अग्रणी देश है। यह भारी निवेश रक्षा, साइबर सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और चिकित्सा जैसे क्षेत्रों में निरंतर नवाचार और नई खोजों को बढ़ावा देने में मदद करता है। वहां की यूनिवर्सिटीज, निजी कंपनियों और सेना के बीच एक मजबूत सहयोग का इकोसिस्टम है जो रिसर्च को वास्तविक समाधानों में तेजी से बदलता है।

अनिवार्य सैन्य सेवा

इजराइल में प्रत्येक नागरिक के लिए 18 साल की आयु पूरी करने के बाद सेना की ट्रेनिंग लेना और सेवा देना पूरी तरह अनिवार्य है। वहां पुरुष और महिला दोनों ही सशस्त्र बलों में सेवा देते हैं जिससे युद्ध की स्थिति में राष्ट्र की रक्षा हेतु प्रशिक्षित व्यक्तियों का बड़ा समूह तैयार रहता है। इस सिस्टम के कारण इजराइल के पास एक विशाल और अनुशासित रिजर्व फोर्स मौजूद है जिसे किसी भी आपात स्थिति के दौरान बहुत तेजी से तैनात किया जा सकता है।

स्टार्टअप नेशन का कल्चर

इजराइल को अक्सर 'स्टार्टअप नेशन' कहा जाता है क्योंकि वहां प्रति व्यक्ति स्टार्टअप की संख्या दुनिया में सबसे अधिक है और युवाओं में रिस्क लेने का कल्चर है। अपनी छोटी आबादी के बावजूद वहां टेक्नोलॉजी, फिनटेक और बायोटेक में हजारों सफल स्टार्टअप हैं जिन्होंने तेल अवीव को वैश्विक तकनीकी केंद्र बना दिया है। सेना के पूर्व अधिकारी भी अपने तकनीकी अनुभव का उपयोग सफल कंपनियां शुरू करने में करते हैं जो इजराइल को रणनीतिक और आर्थिक रूप से आगे रखता है।

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