अमरावती MLC चुनाव: हाईकोर्ट के फैसले के बाद बाजोरिया ने मानी हार, नहीं जाएंगे सुप्रीम कोर्ट

Amaravati MLC Election: अमरावती विधान परिषद चुनाव में नामांकन खारिज होने के बाद कानूनी लड़ाई लड़ रहे विप्लव बाजोरिया ने सुप्रीम कोर्ट न जाने का फैसला किया है, जिससे विवाद थम गया है।
Amravati MLC Election: Bajoria concedes defeat following High Court verdict; will not move Supreme Court.
विप्लव बाजोरिया,(सोर्स: सोशल मीडिया)
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Amaravati Legislative Council Election: अमरावती स्थानीय स्वायत्त निकाय निर्वाचन क्षेत्र की विधान परिषद सीट को लेकर पिछले कुछ दिनों से जारी कानूनी और राजनीतिक संघर्ष पर आखिरकार विराम लग गया है। पूर्व विधायक विप्लव बाजोरिया ने अपने नामांकन पत्र को खारिज किए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट जाने का विचार त्याग दिया है।

मुंबई हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ द्वारा जिला निर्वाचन अधिकारी के निर्णय को बरकरार रखने के बाद बाजोरिया ने आगे कानूनी लड़ाई न लड़ने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही अमरावती विधान परिषद चुनाव में उनकी दावेदारी और चुनावी चुनौती लगभग समाप्त मानी जा रही है।

तकनीकी त्रुटियों के चलते नामांकन हुआ खारिज

नामांकन पत्र में त्रुटियां उल्लेखनीय है कि निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल करने वाले पूर्व विधायक विप्लव बाजोरिया का आवेदन शपथपत्र एवं नामांकन में तकनीकी त्रुटियों के आधार पर जिला निर्वाचन अधिकारी एवं जिलाधीश आशीष येरेकर द्वारा निरस्त कर दिया गया था। इस फैसले को चुनौती देते हुए बाजोरिया ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन वहां भी उन्हें राहत नहीं मिली। न्यायालय ने निर्वाचन अधिकारी के निर्णय को सही ठहराते हुए याचिका खारिज कर दी।

हाई कोर्ट ने खारिज की थी याचिका

इस मामले पर बाजोरिया से संपर्क करने का प्रयास किया गया, किंतु उन्से संपर्क नहीं हो पाया। हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा थी कि बाजोरिया सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकते हैं, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। ऐसा उनके नजदीकी सूत्रों के हवाले से भी पता चला है।

कानूनी जानकारों का मानना है कि हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणियों और चुनाव प्रक्रिया जारी रहने की स्थिति को देखते हुए बाजोरिया ने आगे की लड़ाई से पीछे हटना ही बेहतर समझा। इसके साथ ही अमरावती विधान परिषद चुनाव से उनका अध्याय लगभग समाप्त हो गया है।

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