अकेले रह जाएंगे ट्रंप! भारत बनेगा ग्लोबल बिजनेस का किंग, EU के बाद ब्राजील और कनाडा के साथ होगी ट्रेड डील

India-EU Trade Deal: वैश्विक व्यापार में अमेरिका की अनिश्चितता से कई देश भारत को स्थिर साझेदार मान रहे हैं। ब्रिटेन, कनाडा और ब्राज़ील के साथ आर्थिक रिश्ते मजबूत हो रहे हैं।
India Canada Trade Deal
EU के बाद ब्राजील और कनाडा से ट्रेड डील करने की तैयारी में भारत (सोर्स- सोशल मीडिया)
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India Canada Trade Deal: दुनिया की आर्थिक और व्यापारिक राजनीति तेजी से नए संतुलन की ओर बढ़ रही है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की संरक्षणवादी नीतियों, ऊंचे टैरिफ और अनिश्चित व्यापार रुख ने वैश्विक साझेदारों को वैकल्पिक रणनीतियों पर सोचने के लिए मजबूर कर दिया है। इसी बदलाव के केंद्र में भारत एक मजबूत, स्थिर और भरोसेमंद आर्थिक साझेदार के रूप में उभर रहा है।

यूरोप, एशिया और उत्तरी अमेरिका के कई देश अब पारंपरिक वेस्ट-सेंट्रिक आर्थिक मॉडल से दूरी बनाकर पश्चिम-पूर्व आर्थिक धुरी की ओर बढ़ रहे हैं। इस नई वैश्विक संरचना में भारत को दीर्घकालिक विकल्प और रणनीतिक संतुलन के रूप में देखा जा रहा है।

ब्रिटेन-चीन संबंधों में नई पहल

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर का प्रस्तावित चीन दौरा इसी बदलते वैश्विक समीकरण का संकेत है। यह पिछले आठ वर्षों में किसी ब्रिटिश प्रधानमंत्री की पहली चीन यात्रा होगी। इस दौरे का उद्देश्य दोनों देशों के बीच बिगड़े रिश्तों को सुधारना और व्यापारिक सहयोग को दोबारा गति देना है। स्टारमर के साथ वरिष्ठ मंत्री और कई प्रमुख कारोबारी नेता भी जाएंगे। बीजिंग में उनकी मुलाकात राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री ली कियांग से होगी, जबकि शंघाई में व्यापारिक बैठकों का आयोजन किया जाएगा। मीडिया रिपोर्टस् के मुताबिक ब्रिटेन अब अमेरिका को एक अनिश्चित साझेदार मान रहा है और अपनी आर्थिक निर्भरता कम करने की दिशा में काम कर रहा है। वर्तमान में चीन ब्रिटेन का चौथा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है।

कनाडा-भारत के बदलते रिश्ते

अमेरिका का करीबी सहयोगी रहा कनाडा भी अपनी विदेश और व्यापार नीति में बड़ा बदलाव कर रहा है। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी मार्च के पहले सप्ताह में भारत दौरे की तैयारी कर रहे हैं। यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा पर भारी टैरिफ लगाने की धमकी दी और उसे 51वां अमेरिकी राज्य कहकर विवाद खड़ा कर दिया। कनाडा की विदेश मंत्री अनिता आनंद ने दावोस में स्पष्ट कहा कि कनाडा कभी भी अमेरिका का हिस्सा नहीं बनेगा। उन्होंने यह भी बताया कि कनाडा अगले दस वर्षों में अमेरिका के बाहर अपने निर्यात को दोगुना करना चाहता है। इसी रणनीति के तहत भारत और चीन को प्रमुख व्यापारिक साझेदारों के रूप में चुना गया है।

ग्लोबल साउथ में भारत की बढ़ती भूमिका

ग्लोबल साउथ के देशों के बीच भी भारत की स्थिति लगातार मजबूत हो रही है। ब्राज़ील के राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा फरवरी में भारत दौरे पर आ रहे हैं। वे एक बड़े कारोबारी प्रतिनिधिमंडल के साथ भारतीय उद्योगपतियों से व्यापक बातचीत करेंगे। यह दौरा इस बात का संकेत है कि उभरती अर्थव्यवस्थाएं भारत को केवल एक बाजार नहीं, बल्कि एक रणनीतिक आर्थिक साझेदार के रूप में देख रही हैं।

भारत-यूरोपीय संघ FTA से बदलेगा खेल

इस वैश्विक बदलाव का सबसे बड़ा उदाहरण भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता है, जिस पर 26 जनवरी 2026 को हस्ताक्षर किए गए। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इसे “मदर ऑफ ऑल डील्स” करार दिया है। यह समझौता दुनिया की लगभग 25 प्रतिशत वैश्विक GDP और करीब दो अरब लोगों को आपस में जोड़ता है। समझौते के तहत यूरोपीय संघ भारत को निर्यात किए जाने वाले लगभग 97 प्रतिशत उत्पादों पर टैरिफ घटाएगा या समाप्त करेगा, जबकि भारत भी चरणबद्ध तरीके से 93 प्रतिशत यूरोपीय उत्पादों पर शुल्क हटाएगा। इससे भारत में यूरोपीय कारें, वाइन, चॉकलेट और प्रोसेस्ड फूड सस्ते होंगे, वहीं भारतीय टेक्सटाइल, फार्मा, इंजीनियरिंग और आईटी उत्पादों को यूरोप में बड़ा बाजार मिलेगा।

ट्रंप की टैरिफ नीति और अमेरिका की चिंता

इन नए वैश्विक गठबंधनों से अमेरिका असहज नजर आ रहा है। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने रूस से तेल खरीद को लेकर भारत पर सवाल उठाए हैं, जबकि कनाडा को चीन के सस्ते सामान के खिलाफ चेतावनी दी गई। इसके बावजूद देशों का रुख साफ है वे रणनीतिक स्वायत्तता चाहते हैं और किसी एक शक्ति पर निर्भर नहीं रहना चाहते।

भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने स्पष्ट कहा है कि कोई भी देश यह उम्मीद नहीं कर सकता कि वह भारत के अन्य देशों से संबंधों पर वीटो लगाए। यही नीति आज भारत को बदलती वैश्विक आर्थिक व्यवस्था का एक प्रमुख केंद्र बना रही है।

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