
यूरोपिय यूनियन के नेताओं के साथ पीएम मोदी, (सोर्स-IANS)
India-Europian Union Trade Deal: भारत और यूरोपीय यूनियन (EU) के बीच करीब 18 साल तक चली बातचीत के बाद आखिरकार फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) हो गया है। यह घोषणा 16वें भारत-EU शिखर सम्मेलन में की गई। न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक यह समझौता साल 2027 से लागू हो सकता है।
इस डील का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि भारत में यूरोप से आने वाली महंगी कारें सस्ती हो जाएंगी। अभी BMW और मर्सिडीज जैसी यूरोपीय कारों पर करीब 110% टैक्स लगता है, जिसे घटाकर लगभग 10% किया जाएगा। इससे इन कारों की कीमतों में बड़ी कमी आ सकती है।
इसके अलावा यूरोप से आने वाली शराब और वाइन पर भी टैक्स कम होगा। फिलहाल इन पर 150% तक टैक्स लगता है, जिसे घटाकर 20 से 30% के बीच लाया जा सकता है। भारत दुनिया की चौथी और EU दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। दोनों मिलकर वैश्विक GDP का लगभग 25% और दुनिया के कुल व्यापार का करीब एक-तिहाई हिस्सा रखते हैं।
इस फ्री ट्रेड डील के तहत भारत ने यूरोप से आने वाले कई उत्पादों पर लगने वाला भारी टैक्स खत्म करने या काफी कम करने पर सहमति दी है। अब रसायन, विमान, अंतरिक्ष से जुड़े उपकरण और मेडिकल मशीनें सस्ती दरों पर भारत आ सकेंगी। खास बात यह है कि मेडिकल और सर्जिकल उपकरणों के करीब 90% सामान अब टैक्स-फ्री होंगे, जिससे इलाज से जुड़ी मशीनें और उपकरण सस्ते हो सकते हैं।
समझौते के बाद यूरोप से आने वाले खाद्य उत्पादों पर भी बड़ी राहत मिलेगी। जैतून का तेल, मार्जरीन और दूसरे वनस्पति तेलों पर अब कोई टैक्स नहीं लगेगा। शराब पर लगने वाले टैक्स में भी बड़ी कटौती की गई है। अभी यूरोपीय शराब पर 150% टैक्स लगता है, जिसे घटाकर 20 से 30% किया जाएगा। बीयर पर टैक्स 110% से घटकर 50% होगा, जबकि स्पिरिट पर 40% टैक्स लगाया जाएगा।
भारत-यूरोपीय यूनियन इस फ्री ट्रेड डील के तहत कारों और मशीनों पर भी बड़ी राहत दी गई है। भारत ने यूरोप से आने वाली कारों के लिए हर साल 2.5 लाख गाड़ियों का कोटा तय किया है। इन कारों पर लगने वाला आयात शुल्क धीरे-धीरे घटाकर सिर्फ 10% तक कर दिया जाएगा, जिससे BMW और मर्सिडीज जैसी कारें पहले से सस्ती हो सकेंगी।
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इसके अलावा मशीनरी पर लगने वाला 44% तक का भारी टैक्स और रसायनों पर 22% शुल्क भी लगभग खत्म कर दिया जाएगा। वहीं, विमान और अंतरिक्ष से जुड़े लगभग सभी उत्पाद अब बिना किसी टैरिफ के भारत में आयात किए जा सकेंगे। इससे भारत के एविएशन और अंतरिक्ष सेक्टर को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है।






