फिनलैंड के राष्ट्रपति की भारत से अपील: ईरान-अमेरिका युद्ध रुकवाने के लिए पीएम मोदी बनें 'शांतिदूत'

Broker Iran Peace: फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब ने भारत से ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी युद्ध को रुकवाने की अपील की है। उनका मानना है कि भारत पर दोनों पक्षों को पूरा भरोसा है।
Finland President Alexander Stubb Urges India to Broker Ceasefire in US-Israel-Iran War
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब (सोर्स-सोशल मीडिया)
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India Broker Iran Peace Role: ईरान और अमेरिका-इजरायल गठबंधन के बीच जारी भीषण युद्ध को लेकर फिनलैंड के राष्ट्रपति ने भारत को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब ने नई दिल्ली से अपील की है कि भारत इस विनाशकारी संघर्ष को समाप्त करने में सक्रिय भूमिका निभाए। उनका मानना है कि भारत की संतुलित विदेश नीति के कारण ईरान और अमेरिका दोनों ही पक्ष शांति वार्ता के लिए तैयार हो सकते हैं। भारत ने ईरान-शांति वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभाने के तहत यह कदम पश्चिम एशिया में स्थिरता लाने के लिए एक बहुत महत्वपूर्ण कूटनीतिक पहल साबित हो सकता है।

फिनलैंड की शांति अपील

राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब ने कहा कि दुनिया को पश्चिम एशिया में चल रहे इस खतरनाक युद्ध को तुरंत खत्म करने की कोशिश करनी चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से भारत से अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम के लिए ज्यादा सक्रिय कूटनीतिक भूमिका निभाने की अपील की है। स्टब ने हाल ही में विदेश मंत्री एस जयशंकर की ईरानी नेताओं के साथ हुई बातचीत का हवाला देते हुए भारत की क्षमता पर भरोसा जताया।

भारत पर दोनों का भरोसा

राष्ट्रपति स्टब का मानना है कि नई दिल्ली एक ऐसा मंच है जिस पर ईरान और अमेरिका-इजरायल दोनों पक्ष पूरी तरह से भरोसा करते हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि भारत की कूटनीति इस संघर्ष को शांत करने के लिए दुनिया में सबसे प्रभावी माध्यम साबित हो सकती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री जयशंकर ने पहले ही ईरानी राष्ट्रपति और विदेश मंत्री से शांति स्थापित करने के लिए वार्ता की है।

युद्ध की भीषण तबाही

28 फरवरी से शुरू हुए इस युद्ध में ईरान के कई शीर्ष नेतृत्व और वरिष्ठ कमांडरों को हवाई हमलों में अपनी जान गंवानी पड़ी है। ईरान में अब तक 1300 से अधिक आम नागरिकों की मौत हो चुकी है जिनमें मासूम 165 बच्चियां भी शामिल बताई जा रही हैं। हवाई हमलों के कारण ईरान को जान-माल का भारी नुकसान हुआ है और वहां के कई महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पूरी तरह से तबाह हो गए हैं।

वैश्विक ऊर्जा का संकट

ईरान ने इन हमलों के जवाब में अमेरिका के सैन्य ठिकानों पर ड्रोन अटैक किए हैं और इजरायल पर कई मिसाइलें भी दागी हैं। ईरान द्वारा होर्मुज के समुद्री गलियारे को बंद करने से पूरी दुनिया की ऊर्जा और गैस की सप्लाई पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ा है। भारत सहित कई देशों के लिए तेल की आपूर्ति में आई यह रुकावट एक बड़ी आर्थिक चुनौती और गंभीर वैश्विक संकट बन गई है।

कूटनीतिक समाधान की जरूरत

फिनलैंड के राष्ट्रपति के अनुसार यूरोप और भारत को मिलकर इस युद्ध को रोकने के लिए अब सामूहिक प्रयास करने की आवश्यकता है। रायसीना डायलॉग 2026 के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि शांति ही एकमात्र रास्ता है जिससे इस मानवीय संकट को रोका जा सकता है। ईरान युद्ध के 18 दिन बीतने के बाद अब पूरी दुनिया की नजरें भारत की संभावित और प्रभावी शांतिदूत की भूमिका पर टिकी हुई हैं।

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