भारत और यूरोपीय संघ 'Mother of All Deals' के करीब... दुनिया की एक-चौथाई अर्थव्यवस्था पर होगा बड़ा असर

India EU FTA: भारत और यूरोपीय संघ 'मदर ऑफ ऑल डील्स' के करीब हैं। यह ऐतिहासिक समझौता 2 अरब लोगों का बाजार बनाएगा और वैश्विक GDP के करीब 25% हिस्से का प्रतिनिधित्व करेगा, जिससे व्यापार बढ़ेगा।
Mother of All Deals: India and EU Set to Finalize Landmark FTA Covering 25% of Global GDP
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (सोर्स-सोशल मीडिया)
Published on
Updated on

India EU trade agreement impact: भारत और यूरोपीय संघ के बीच लंबे समय से लंबित मुक्त व्यापार समझौता (FTA) अब अपने अंतिम और निर्णायक चरण में पहुंच गया है। इस ऐतिहासिक व्यापारिक समझौते को विशेषज्ञों द्वारा 'मदर ऑफ ऑल डील्स' के नाम से भी संबोधित किया जा रहा है। भारत-ईयू व्यापार समझौते के प्रभाव की गूंज हाल ही में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दावोस शिखर सम्मेलन में भी प्रमुखता से सुनाई दी है। यह समझौता न केवल दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को जोड़ेगा बल्कि वैश्विक स्तर पर सप्लाई-चेन की पूरी दिशा बदलने की क्षमता रखता है।

दावोस में बड़ी घोषणा

यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने दावोस शिखर सम्मेलन में मंगलवार को इस महत्वपूर्ण समझौते के जल्द पूरा होने के संकेत दिए हैं। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि हम एक ऐसे ऐतिहासिक व्यापार समझौते के बिल्कुल करीब हैं जो 2 अरब लोगों का विशाल बाजार बनाएगा। उनके अनुसार यह समझौता वैश्विक GDP के लगभग एक-चौथाई हिस्से का प्रतिनिधित्व करेगा जो दोनों पक्षों के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि होगी।

चीन पर घटेगी निर्भरता

यूरोपीय संघ के लिए भारत अब चीन पर अपनी आर्थिक निर्भरता कम करने की रणनीति में एक बहुत ही महत्वपूर्ण और भरोसेमंद साझेदार बन चुका है। ब्रसेल्स अब एक-देशीय निर्भरता से बाहर निकलकर अपनी सप्लाई-चेन को अधिक लचीला और विविध बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। वहीं भारत के लिए 27 देशों के इस ब्लॉक तक आसान पहुंच उसके निर्यात और विनिर्माण क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर मजबूती देगी।

व्यापार के रिकॉर्ड आंकड़

भारत और यूरोपीय संघ के बीच द्विपक्षीय व्यापार पहले ही रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है जो इस समझौते की भविष्य की संभावनाओं को दर्शाता है। साल 2023 में वस्तुओं का कुल व्यापार 124 अरब यूरो तक पहुंचा है जबकि डिजिटल और आईटी क्षेत्र में सेवाओं का व्यापार 60 अरब यूरो रहा। औपचारिक समझौता होने के बाद स्वच्छ ऊर्जा, फार्मास्यूटिकल्स और उन्नत विनिर्माण जैसे उभरते हुए क्षेत्रों में व्यापार की संभावनाएं और अधिक बढ़ जाएंगी।

समझौते की मुख्य अड़चनें

आशावादिता के बावजूद कुछ राजनीतिक रूप से संवेदनशील मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच अभी भी गहन विचार-विमर्श की प्रक्रिया निरंतर जारी है। यूरोपीय वार्ताकार चाहते हैं कि भारत अपने घरेलू उद्योगों की सुरक्षा के लिए लगाए गए ऑटोमोबाइल, वाइन और स्पिरिट्स पर आयात शुल्क को कम करे। दूसरी ओर भारत अपने कुशल पेशेवरों के लिए यूरोपीय देशों में आसान वीजा नियम और बेहतर गतिशीलता की अनुकूल शर्तों की मांग कर रहा है।

नई गति और सहयोग

भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते पर पहली बार बातचीत साल 2007 में शुरू हुई थी लेकिन एक दशक तक ठप रहने के बाद इसे 2022 में फिर से शुरू किया गया। अब ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल के माध्यम से डिजिटल गवर्नेंस और सप्लाई-चेन जैसे आधुनिक मुद्दों पर भी दोनों पक्षों के बीच सहयोग काफी बढ़ा है। इस समानांतर मंच ने संवेदनशील नियामकीय मसलों पर मतभेदों को कम करने और बातचीत को आधुनिक स्वरूप देने में मदद की है।

अंतिम दौर की बातचीत

वैश्विक स्तर पर हो रहे भू-राजनीतिक बदलावों ने दोनों पक्षों के बीच इस समझौते को जल्द से जल्द अंतिम रूप देने की बड़ी जल्दबाजी पैदा कर दी है। ब्रसेल्स अपनी आर्थिक आत्मनिर्भरता बढ़ाना चाहता है जबकि भारत खुद को बदली हुई वैश्विक सप्लाई-चेन का एक मजबूत केंद्रीय केंद्र बनाना चाहता है। वार्ताकारों का मानना है कि औपचारिक समझौता होने के बाद निवेश का प्रवाह बढ़ेगा और बाजार तक पहुंच काफी अधिक भरोसेमंद हो जाएगी।

रणनीतिक साझेदारी का महत्व

अगर यह 'मदर ऑफ ऑल डील्स' सफल होती है तो यह हाल के वर्षों में यूरोपीय संघ की सबसे महत्वपूर्ण और बड़ी व्यापारिक उपलब्धियों में से एक होगी। यह न केवल वस्तुओं और निवेश के प्रवाह को बढ़ाएगा बल्कि तकनीक और मानकों पर सहयोग को भी एक नया और व्यापक विस्तार देगा। वैश्विक व्यापार व्यवस्था में भारत की भूमिका इस समझौते के बाद और अधिक शक्तिशाली और प्रभावशाली होकर दुनिया के सामने आएगी।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com