नवभारत संपादकीय: गुजरात में कैसे निर्विरोध निर्वाचित हुए BJP के 700 प्रत्याशी

Gujarat Local Body Election Results: गुजरात स्थानीय निकाय चुनाव में BJP के 700 से अधिक उम्मीदवारों की निर्विरोध जीत ने सियासी हलचल मचा दी है। क्या यह मोदी-शाह के गढ़ में विपक्ष के खात्मे का संकेत है?
Navabharat Editorial: How 700 BJP Candidates Were Elected Uncontested in Gujarat
गुजरात में निर्विरोध निर्वाचन,(प्रतीकात्मक तस्वीर सोर्स: सोशल मीडिया)
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BJP Uncontested Win Gujarat: विपक्षी प्रत्याशियों की नाम वापसी की वजह से गुजरात में हाल ही हुए स्थानीय निकाय चुनाव में बीजेपी के 700 से अधिक उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हुए। क्या यह पार्टी की अपार लोकप्रियता का संकेत है? विपक्ष ने इसके पीछे सत्ता के दुरुपयोग का आरोप लगाया। गुजरात की 15 महापालिकाओं में बीजेपी ने बाजी मारी। नगरपालिका, पंचायत चुनाव में भी बीजेपी ने सफलता के झंडे गाड़े। शहरी, कस्बाई और ग्रामीण क्षेत्रों में पार्टी का वर्चस्व रहा। बीजेपी ने 60 प्रतिशत कांग्रेस ने 26 प्रतिशत तथा आप ने 10 प्रतिशत वोट हासिल किए।महानगरपालिकाओं में 90 फीसदी से ज्यादा सीटें बीजेपी ने जीतीं।

प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के गृहराज्य में पिछले 30 वर्षों में बीजेपी बहुत मजबूत हो गई है। केवल 2017 में पटेल-पाटीदार समाज के आरक्षण आंदोलन की वजह से बीजेपी को थोड़ा झटका लगा था, लेकिन 2022 में हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने कुल 182 में से 156 सीटें जीतकर विपक्षी दलों को धूल चटा दी थी। स्थानीय निकाय चुनाव में भी यही ट्रेंड कायम रहा। इतने पर भी 700 से ज्यादा उम्मीदवारों का निर्विरोध चुना जाना क्या यह बताता है कि विपक्षी पार्टियों का मनोबल बुरी तरह टूट चुका है? उन्होंने उम्मीदवार खड़े क्यों नहीं किए या प्रत्याशियों ने नाम क्यों वापस ले लिए?

गुजरात में कब शुरू हुआ निर्विरोध चुनाव का सिलसिला?

गुजरात में निर्विरोध निर्वाचन की शुरुआत 2024 के लोकसभा चुनाव के समय हुई, तब सूरत लोकसभा सीट से कांग्रेस सहित अन्य पार्टी प्रत्याशियों ने नाम वापस ले लिया तथा कुछ उम्मीदवारों के नामांकन रद्द कर दिए गए, जिससे बीजेपी प्रत्याशी मुकेश दलाल लोकसभा के लिए निर्विरोध चुन लिए गए थे। इस समय भी निकाय चुनाव मे कांग्रेस व आम आदमी पार्टी के लगभग 400 उम्मीदवारों ने नाम वापस ले लिए। इससे बीजेपी प्रत्याशियों का निर्विरोध निर्वाचन संभव हुआ।

महाराष्ट्र में महायुति ने विपक्षी उम्मीदवारों पर बनाया दबाव

यदि महाराष्ट्र की चर्चा करें तो विपक्ष का आरोप है कि कल्याण-डोंबिवली, पनवेल, ठाणे महापालिका में महायुति ने पैसे के बल पर विपक्षी उम्मीदवारों को नाम वापस लेने के लिए बाध्य किया। एक ओर तो बीजेपी नेता निर्विरोध चुनाव कराने के लिए काफी खटपट करते हैं, वहीं दूसरी ओर पार्टी के गुजरात प्रदेशाध्यक्ष का दावा है कि 25 वर्षों में बीजेपी ने इतना बढ़िया काम किया कि लोग उसे ही प्रचंड बहुमत देते हैं।

2024 में विधि सेंटर फॉर लीगल पॉलिसी नामक संस्था ने एक भी मत हासिल न करने वाले उम्मीदवार के निर्विरोध निर्वाचन को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। इस याचिका पर अप्रैल 2025 में सुनवाई हुई तब अदालत ने राय दी कि बगैर वोट पड़े किसी को निर्वाचित घोषित न किया जाए-इस बारे में केंद्र सरकार का मत मांगा गया। इसके बाद इस याचिका पर सुनवाई ही नहीं हुई। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मतदाताओ को ईवीएम पर नोटा का विकल्प उपलब्ध कराया गया।