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‘ईरान में काम अधूरा मत छोड़ना’… 5 खाड़ी देशों ने डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिका पर ईरान को लेकर बनाया भारी दबाव
Gulf Countries Pressure: खाड़ी देशों ने अमेरिका से मांग की है कि ईरान के खिलाफ युद्ध को अधूरा न छोड़ा जाए। ईरान द्वारा तेल सुविधाओं और बंदरगाहों पर हमलों के बाद इन देशों का रुख पूरी तरह बदल गया है।
- Written By: प्रिया सिंह

डोनाल्ड ट्रंप (सोर्स-सोशल मीडिया)
US Policy Against Iran: पश्चिम एशिया में जारी भीषण जंग के बीच अब खाड़ी देशों का रुख ईरान के प्रति पूरी तरह बदल चुका है। ईरान द्वारा किए गए मिसाइल हमलों के बाद पांच बड़े खाड़ी देशों ने डोनाल्ड ट्रंप पर दबाव बनाया है। ये देश चाहते हैं कि अमेरिका इस सैन्य अभियान को अंजाम तक पहुंचाए और इसे बीच में बिल्कुल न छोड़े। ईरान के प्रति अमेरिकी नीति के तहत अब खाड़ी देश क्षेत्र की सुरक्षा के लिए आक्रामक रुख अपना रहे हैं।
बदला हुआ रुख
शुरुआत में खाड़ी देशों ने ईरान का बचाव किया था और क्षेत्र में किसी भी बड़े युद्ध का कड़ा विरोध किया था। लेकिन पिछले तीन हफ्तों में ईरान ने इन देशों के महत्वपूर्ण हवाई अड्डों और बंदरगाहों को निशाना बनाया है। गल्फ रिसर्च सेंटर के अब्दुल अजीज सागर के अनुसार अब ईरान उनका दुश्मन बन गया है जिसे रोकना जरूरी है।
रेड लाइन पार
ईरान ने खाड़ी देशों की तेल सुविधाओं पर ड्रोन हमले करके शांति की सभी सीमाओं और रेड लाइन को पार कर दिया है। नेताओं का मानना है कि जब तक ईरान की हमला करने की शक्ति खत्म नहीं होगी तब तक क्षेत्र असुरक्षित रहेगा। राजनयिकों को डर है कि ईरान भविष्य में ऊर्जा की वैश्विक आपूर्ति को फिर से बंधक बना सकता है और संकट बढ़ाएगा।
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होर्मुज का संकट
ईरान ने व्यापार के मुख्य मार्ग स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को बंद कर दिया है जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति ठप हो गई है। इस मार्ग के बंद होने से खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्था, पर्यटन और व्यापारिक छवि को बहुत गहरा नुकसान पहुंचा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इस खतरे का समाधान तुरंत नहीं हुआ तो यह क्षेत्र में लंबे समय तक बना रहेगा।
ट्रंप पर दबाव
खाड़ी देशों को सबसे बड़ा डर यह है कि अमेरिका ईरान की सैन्य शक्ति को तबाह किए बिना पीछे हट जाएगा। अब्दुल अजीज सागर ने चेतावनी दी है कि काम पूरा होने से पहले अमेरिकी वापसी उनके लिए बेहद खतरनाक होगी। अगर अमेरिका पीछे हटता है तो खाड़ी देशों को भविष्य में ईरान की आक्रामकता का सामना अकेले ही करना पड़ेगा।
यह भी पढ़ें: ईरान पर परमाणु हमला करेगा इजरायल? डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान को लेकर किया बड़ा दावा, बोले- 90% मिसाइल खत्म
जवाबी कार्रवाई
सऊदी अरब फिलहाल सीधे युद्ध में शामिल नहीं है लेकिन उसने अपनी तेल सुविधाओं की सुरक्षा पर चिंता जताई है। अगर ईरान ने पानी साफ करने वाले प्लांट को निशाना बनाया तो रियाद जवाबी हमला करने को मजबूर हो सकता है। क्षेत्र के सभी बड़े देश अब चाहते हैं कि ट्रंप प्रशासन ईरान की सैन्य क्षमताओं को पूरी तरह से नेस्तनाबूद कर दे।
Frequently Asked Questions
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Que: खाड़ी देश अमेरिका और डोनाल्ड ट्रंप से क्या मांग कर रहे हैं?
Ans: खाड़ी देश अमेरिका पर दबाव डाल रहे हैं कि ईरान के खिलाफ शुरू किए गए युद्ध को अधूरा न छोड़ा जाए।
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Que: ईरान ने खाड़ी देशों में किन जगहों पर हमले किए हैं?
Ans: ईरान ने पिछले तीन हफ्तों में खाड़ी देशों के हवाई अड्डों, बंदरगाहों और तेल सुविधाओं को मिसाइलों और ड्रोन से निशाना बनाया है।
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Que: स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज का बंद होना क्यों चिंताजनक है?
Ans: यह मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति की जीवन रेखा है और इसके बंद होने से क्षेत्र की अर्थव्यवस्था और व्यापार खतरे में है।
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Que: खाड़ी देशों के अनुसार ईरान ने कौन सी 'रेड लाइन' पार कर दी है?
Ans: तेल सुविधाओं और नागरिक बुनियादी ढांचों पर सीधे हमले करने के कारण खाड़ी देश मानते हैं कि ईरान ने सभी सीमाएं पार कर दी हैं।
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Que: अगर अमेरिका बीच में ही पीछे हट जाता है तो क्या खतरा है?
Ans: नेताओं का मानना है कि अगर ईरान की सैन्य क्षमता बची रही, तो वह भविष्य में और भी अधिक आक्रामक हो जाएगा।
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