अमेरिका की गोद में बैठा पाकिस्तान...चीन को ही दिखाने लगा आंख, चीनी कंपनियों से बोला-निकल जाओ

Pakistan News: पाकिस्तान में FBR और चीनी कंपनियों के बीच विवाद, जहाँ कैमरों की निगरानी को लेकर कंपनियों ने गोपनीयता का उल्लंघन बताया, जबकि FBR ने कर चोरी रोकने के लिए कैमरे हटाने से इनकार किया।
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अमेरिका-पाकिस्तान-चीन (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Pakistan FBR-Chinese Company Controversy: चीन को पाकिस्तान की पक्का दोस्त माना जाता है। कई मौकों पर दोनों देश एक-दूसरे को अपना सबसे करीबी बताते रहे हैं, लेकिन ताजा घटनाक्रम के तहत पाकिस्तान में ऐसा कुछ घट रहा है जिसने चीनी कंपनियों के साथ पूरी दुनिया को हैरानी में डाल दिया है। दरअसल, पाकिस्तान ने एक विवाद के चलते चार बड़ी चीनी कंपनियों को अपना संचालन बंद करने के लिए कह दिया है।

पिछले कुछ समय से पाकिस्तान चीन की जगह अमेरिका के पाले में खड़ा नजर आने लगा है। जिसके चलते चीन के साथ उनकों रिश्तों में दूरियां आ गई है, ये दूरियों हाल ही तब देखने को मिली जब पाकिस्तान के फेडरल बोर्ड ऑफ रेवेन्यू (FBR) और पाकिस्तान में कार्यरत चीनी कंपनियों के बीच गंभीर विवाद सामने आया। यह विवाद चार चीनी टाइल निर्माण फैक्ट्रियों में लगाए गए इलेक्ट्रॉनिक मॉनिटरिंग कैमरों को लेकर इतना बढ़ गया कि FBR ने इन कंपनियों को दो टूक शब्दों में चेतावनी दी कि अगर उन्हें यह व्यवस्था पसंद नहीं है, तो वे पाकिस्तान में अपना संचालन बंद कर सकती हैं।

अरबों की चोरी से जुड़ा मामला

यह पूरा मामला पाकिस्तान की संसद की सीनेट स्टैंडिंग कमेटी ऑन फाइनेंस एंड रेवेन्यू की बैठक में उठा, जिसकी अध्यक्षता सांसद सलीम मण्डवीवाला कर रहे थे। बैठक में FBR के चेयरमैन राशिद महमूद लैंगरियल ने बताया कि केवल टाइल सेक्टर में ही लगभग 30 अरब पाकिस्तानी रुपये की कर चोरी का संदेह है। उन्होंने कहा कि वास्तविक उत्पादन पर नजर रखने और कर चोरी रोकने के लिए कैमरों की मौजूदगी जरूरी है, इसलिए इन्हें हटाने पर कोई विचार नहीं किया जा सकता।

लैंगरियल ने समिति को बताया कि कैमरे लगाने की प्रक्रिया चीनी उद्योग से शुरू हुई थी, जहाँ लगभग 76 अरब रुपये की टैक्स चोरी पकड़ी गई। इसके बाद सीमेंट उद्योग की निगरानी के दौरान लगभग 102 अरब रुपये का नुकसान उजागर हुआ। टाइल सेक्टर में यह आंकड़ा भी 30 अरब रुपये तक पहुंच गया।

हटाए गए कैमरे

हालाँकि, FBR चेयरमैन ने समिति को स्पष्ट किया कि इस विवाद को काफी हद तक सुलझा लिया गया है। उनके अनुसार, 15 में से 11 कैमरे पहले ही हटा दिए गए हैं और अब केवल चार कैमरे लगाए गए हैं, जिनका मकसक मात्र उत्पादन की गणना करना है। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता टैक्स चोरी को रोकना है, इसलिए कैमरे हटाने की मांग मान्य नहीं हो सकती।

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