
पाक में GHQ के पास गुप्त कैंप बना रहा लश्कर, सांकेतिक तस्वीर, (सो. सोशल मीडिया)
Rawalpindi Terror Base: रावलपिंडी स्थित पाकिस्तान आर्मी हेडक्वार्टर्स (GHQ) से मात्र 5 किलोमीटर दूर आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) एक नया और बड़ा ट्रेनिंग सेंटर तैयार कर रहा है। यह वही क्षेत्र है जिसे पाकिस्तान दुनिया के सामने सबसे सुरक्षित सैन्य जोन बताता है। ऐसे संवेदनशील इलाके के पास आतंकियों का नया आधारभूत ढांचा खड़ा होना कई गंभीर सवाल खड़ा करता है।
सूत्रों के अनुसार, इस नए सेंटर का नाम ‘मरकज अल-कुद्स’ रखा गया है और लश्कर-ए-तैयबा का दावा है कि यह सुविधा अगले रमजान तक पूरी तरह संचालित हो जाएगी। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस निर्माण को छुपाने की जगह खुलकर एक आधुनिक “कम्युनिटी और अर्बन वॉरफेयर सेंटर” के रूप में दिखाया जा रहा है। लेकिन इसके भीतर जो गतिविधियां चल रही हैं, वे पूरी तरह भारत-विरोधी आतंकी अभियानों की तैयारी का इशारा देती हैं।
खुफिया इनपुट्स में पता चला है कि अमेरिका द्वारा नामित ग्लोबल टेररिस्ट और लश्कर का वरिष्ठ कमांडर हाफिज अब्दुल रऊफ खुद इस साइट का दौरा कर चुका है। रऊफ वही आतंकी है जिसने भारतीय स्ट्राइक में ढेर हुए LeT आतंकियों की नमाज-ए-जनाजा पाकिस्तान आर्मी अधिकारियों की मौजूदगी में पढ़ाई थी। रावलपिंडी पहुंचकर उसने इस नए प्रोजेक्ट को “लश्कर के लिए नई सुबह” बताया। यह बयान इस बात का साफ संकेत है कि पाकिस्तान की आतंकी संरचना आज भी सैन्य संस्थानों की नाक के नीचे ही फल-फूल रही है।
सूत्रों ने बताया कि मरकज अल-कुद्स एक डुअल-यूज टेरर फैसिलिटी के रूप में डिजाइन किया गया है। बाहर से इसे सामुदायिक विकास केंद्र की तरह प्रस्तुत किया जा रहा है, जबकि अंदर विस्फोटक प्रशिक्षण, अर्बन कॉम्बैट ड्रिल, हथियार संचालन और भारत के खिलाफ शत्रुता फैलाने वाले मॉड्यूल तैयार किए जा रहे हैं। यह केंद्र पाकिस्तान की उस पुरानी नीति का ताजा उदाहरण है जिसमें वह अपनी धरती का उपयोग आतंकी संगठनों को संरक्षण देने और भारत के खिलाफ इस्तेमाल करने में करता रहा है।
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सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि GHQ से इतनी कम दूरी पर इतना बड़ा आतंकी ढांचा कैसे बन रहा है? क्या यह पाकिस्तान आर्मी की खुली मंजूरी के बिना संभव है? या फिर स्वयं सेना इसमें सीधी भागीदारी निभा रही है? इस घटनाक्रम ने एक बार फिर साबित किया है कि पाकिस्तान की जमीन अब भी लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठनों के लिए सुरक्षित ठिकाना बनी हुई है, और वे न सिर्फ सक्रिय हैं बल्कि तेजी से विस्तार भी कर रहे हैं वह भी सेना की मौजूदगी वाले क्षेत्रों में।






