Eli Cohen मोसाद का वो जासूस जो बनने वाला था दुश्मन देश का 'डिफेंस मिनिस्टर', राज खुलने पर सब रह गए थे हैरान

एली कोहेन, मिस्र में जन्मे एक यहूदी, इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद के लिए सीरिया में जासूसी करते थे। वह सीरियाई सरकार में इतनी गहराई तक घुस चुके थे कि उन्हें मंत्री बनाए जाने की चर्चा होने लगी थी।
Eli Cohen मोसाद का वो जासूस जो बनने वाला दुश्मन देश का 'डिफेंस मिनिस्टर', राज खुलने पर सब रह गए थे हैरान
एली कोहेन (फोटो- सोशल मीडिया)
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तेल अवीव: 18 मई 1965 की सुबह। दमिश्क की एक भीड़भाड़ वाली गली में एक आदमी को फांसी दी जा रही थी। हजारों आंखें उसे घूर रही थीं। कुछ नफरत से, कुछ हैरानी से, और कुछ खामोश सम्मान से। किसी को अंदाजा नहीं था कि यह आदमी, जो खुद को "कामेल अमीन थाबेत" कहता था, असल में इजराइल का सबसे खतरनाक और सफल जासूस था, एली कोहेन।

सीरिया की सरकार तक, सेना के ऊपरी अफसर तक, और यहां तक कि राष्ट्रपति के सलाहकारों तक, हर कोई इस व्यक्ति की बात सुनता था। वह इतना घुल-मिल गया था कि उसे अगला रक्षा मंत्री और प्रधानमंत्री तक बनाए जाने की चर्चा थी। लेकिन किसे पता था कि वह जो बातें करता है, जो सलाह देता है, वे सीधा दुश्मन देश के कानों में जा रही हैं?

कौन था एली कोहेन?

एली कोहेन का जन्म 1924 में मिस्र के अलेक्ज़ान्द्रिया में एक यहूदी परिवार में हुआ था। पढ़ाई में तेज, भाषाओं और मध्य-पूर्व की राजनीति की गहरी समझ रखने वाला कोहेन 1957 में इजराइल आ गया। जल्द ही उसकी प्रतिभा पर मोसाद की नजर पड़ी और उसे एक खास मिशन के लिए चुना गया। उन्हें सीरिया में घुसपैठ करने के लिए चुना गया। एली को चुनने की सबसे बड़ी वजह थी उनके मिस्र से होना और अरबी भाषा की अच्छी समझ होना।

कामेल अमीन थाबेत की भूमिका

मोसाद ने एली को एक नया नाम, एक नई पहचान और एक नई जिंदगी दी। वह अर्जेंटीना के रास्ते सीरिया पहुंचा और वहां के अमीर व्यापारियों में से एक बनकर उभरा। जल्द ही वो दमिश्क के राजनीतिक गलियारों में गहरी पैठ बना चुका था। सैन्य अधिकारियों से उसकी दोस्ती इतनी गहरी थी कि कई बार रणनीतिक बैठकों में भी उसे आमंत्रित किया जाता। क्योंकि एली कोहेन ने सीरिया में 1963 के बाथिस्ट तख्तापलट में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, जिसके बाद सत्ता में आए अमीन अल-हाफ़िज़  एली को अपना सबसे अच्छा दोस्त मानते थे।

वो जानकारी जिसने युद्ध की दिशा बदल दी

कोहेन ने सालों तक सीरिया की गोपनीय सूचनाएं इजराइल को भेजीं। वो सीरियन लोगों के समाने इजराइल की बुराई करते और उन्हें खत्म करने की बात करते। उस दौर में एली बिना किसी पद के सीरियन सेना के बंकरों का दौरा करते, सैनिकों की तैनाती, हथियारों का जखीरा के बारे में जानकारी इजराइल को भेजते। ये सारी जानकारियां 1967 के "सिक्स डे वॉर" में इजराइल की जीत की अहम वजह बनीं।

पकड़े जाने और बलिदान की दास्तां

कोहेन को बार-बार रेडियो संदेश भेजने के कारण पकड़ लिया गया। जब उसकी असली पहचान सामने आई, सीरियन सरकार सकते में थी। उसे जासूस घोषित कर सार्वजनिक रूप से फांसी दी गई। उनकी लाश को कई दिनों तक दमिश्क के एक चौराहे पर रखा गया। जहां से लोग गुजरते और सोचते की एक आदमी ने कैसे पूरा सीरिया की आंखों में धूल झोंक दिया। अगर वो रक्षा मंत्री बन जाता तो क्या होता? या वो आगे चलकर सीरिया का राष्ट्रपति बन जाता तो क्या होता?

एली कोहेन आज भी इजराइल में राष्ट्रीय हीरो माना जाता है। उनके नाम पर स्कूल, सड़कें और संस्थान बने हैं। उनकी पत्नी नादिया कोहेन आज भी उनकी अस्थियां वापस लाने की मांग कर रही हैं, ताकि उन्हें अपने देश की मिट्टी में अंतिम सम्मान मिल सके।

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