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H-1B वीजा या ट्रंप गोल्ड कार्ड! दोनों में क्या है अंतर…आखिर किससे मिलेगा ज्यादा फायदा?
Gold Card vs H-IB Visa: ट्रंप ने एक तरफ H-1B वीजा की फीस बढ़ाने का फैसला लिया है, वहीं दूसरी ओर उन्होंने अमेरिका की नागरिकता पाने के लिए "ट्रंप गोल्ड कार्ड" का प्रस्ताव रखा है।
- Written By: अमन उपाध्याय

H-1B वीजा या ट्रंप गोल्ड कार्ड! दोनों में क्या है अंतर, फोटो (सो.सोशल मीडिया)
H-1B visa vs Trump Gold Card: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने H-1B वीज़ा प्रोग्राम को कड़ा करने के साथ एक नया विकल्प ‘ट्रंप गोल्ड कार्ड’ पेश किया है। इस योजना के तहत यदि कोई व्यक्ति 1 मिलियन डॉलर का व्यक्तिगत निवेश करता है या 2 मिलियन डॉलर की कंपनी स्पॉन्सरशिप लाता है, तो उसे सीधे अमेरिकी नागरिकता मिल सकेगी। ट्रंप ने इसे ग्रीन कार्ड का “हाई-स्पीड रूट” बताया है, जो मौजूदा EB-1 और EB-2 प्रोग्राम की जगह ले सकता है।
ट्रंप का दावा है कि इस योजना से अमेरिका को 100 अरब डॉलर से ज्यादा की आमदनी होगी और साथ ही दुनिया के शीर्ष स्तर के टैलेंट को आकर्षित किया जा सकेगा। हालांकि, अभी यह सिर्फ एक प्रस्ताव है, जिसे अमल में लाने के लिए कांग्रेस की मंजूरी जरूरी होगी। इसके अलावा, ट्रंप ने एक और योजना ‘ट्रंप प्लेटिनम कार्ड’ का भी प्रस्ताव रखा है। इसमें 5 मिलियन डॉलर का निवेश करने पर विदेशी आय पर टैक्स छूट की सुविधा दी जाएगी।
दोनों में क्या है अंतर?
1. H-1B वीज़ा अमेरिका में सीमित समय के लिए नौकरी या काम करने की अनुमति देता है, जिससे विदेशियों को वहां आने का अवसर मिलता है। दूसरी ओर, ट्रंप गोल्ड कार्ड सीधे अमेरिकी नागरिकता का रास्ता बनेगा।
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2. H-1B वीज़ा के लिए बेस फीस 460 डॉलर है, लेकिन अन्य चार्ज मिलाकर लगभग 1 लाख डॉलर तक का अतिरिक्त वार्षिक खर्च आ सकता है। वहीं ट्रंप गोल्ड कार्ड के लिए निवेश (1 या 2 मिलियन डॉलर) के साथ-साथ प्रोसेसिंग फीस भी देनी होगी।
3. H-1B वीज़ा धारक की पत्नी/पति को H-4 वीज़ा मिलता है, जिसमें बच्चे भी शामिल किए जा सकते हैं। जबकि ट्रंप गोल्ड कार्ड की सुविधा पूरे परिवार को एक साथ मिलती है।
4. H-1B वीज़ा का उद्देश्य खासतौर पर टेक्नोलॉजी सेक्टर की कंपनियों को दूसरे देशों से टैलेंटेड इंजीनियर और प्रोफेशनल्स को नियुक्त करने की सुविधा देना है। जबकि ट्रंप गोल्ड कार्ड का मकसद विदेशी लोगों और कंपनियों से निवेश आकर्षित करना है और बदले में उन्हें अमेरिका की स्थायी नागरिकता यानी ग्रीन कार्ड उपलब्ध कराना है। इससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
यह भी पढ़ें:- अमेरिका में हड़कंप! टेलिकॉम गड़बड़ी से सैकड़ों उड़ानें रद्द, यात्रियों की मुश्किलें बढ़ीं
5. H-1B वीज़ा पाने के लिए आवेदक के पास ग्रेजुएशन की डिग्री होनी चाहिए और उसे किसी अमेरिकी कंपनी की स्पॉन्सरशिप भी ज़रूरी है। वहीं ट्रंप गोल्ड कार्ड हासिल करने के लिए व्यक्ति को कम से कम 1 मिलियन डॉलर व्यक्तिगत निवेश और 2 मिलियन डॉलर कंपनी निवेश करना होगा।
6. H-1B वीज़ा पहले 3 साल के लिए दिया जाता है और बाद में इसे 3 साल और बढ़ाया जा सकता है। कुल 6 साल पूरे होने के बाद ग्रीन कार्ड के लिए अप्लाई करने का विकल्प मिलता है। दूसरी तरफ, ट्रंप गोल्ड कार्ड खुद एक ग्रीन कार्ड की तरह है, जो सीधे स्थायी निवास देता है।
Difference between h1b visa and trump gold card us citizenship
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