राष्ट्रपति ने चंद्रपुर की उज्ज्वला सोयाम को दिया राष्ट्रीय फ्लोरेंस नाइटिंगेल पुरस्कार, सेवा को सम्मान

Chandrapur News: नर्स उज्ज्वला सोयाम को नक्सल क्षेत्रों में उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाओं के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा 'राष्ट्रीय फ्लोरेंस नाइटिंगेल पुरस्कार 2026' से सम्मानित किया गया।
President Droupadi Murmu honored Chandrapur’s Ujjwala Soyam with the National Florence Nightingale Award 2026 for her exemplary healthcare service in Naxal-hit tribal regions.
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा 'राष्ट्रीय फ्लोरेंस नाइटिंगेल पुरस्कार 2026' से सम्मानित (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)
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Chandrapur National Florence Nightingale Award 2026 President Droupadi Murmu: महाराष्ट्र के दुर्गम, आदिवासी और नक्सल प्रभावित इलाकों में वर्षों से स्वास्थ्य सेवा की अलख जगा रहीं चंद्रपुर की नर्सिंग अधिकारी उज्ज्वला महादेव सोयाम को देश के सर्वोच्च नर्सिंग सम्मानों में से एक ‘राष्ट्रीय फ्लोरेंस नाइटिंगेल पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया है। नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस 2026 के अवसर पर आयोजित भव्य समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें यह प्रतिष्ठित पुरस्कार प्रदान किया। उज्ज्वला सोयाम को यह सम्मान स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में उनके 24 वर्षों के समर्पण, सेवा भावना और विशेष योगदान के लिए दिया गया।

इस समारोह में देशभर से चयनित कुल 15 उत्कृष्ट नर्सिंग अधिकारियों और कर्मचारियों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा, स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव तथा स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलीला श्रीवास्तव सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सभी सम्मानित नर्सिंग कर्मियों की सेवाओं की सराहना करते हुए कहा कि देश की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने में नर्सों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

चंद्रपुर के शासकीय सामान्य अस्पताल में कार्यरत उज्ज्वला सोयाम पिछले दो दशकों से अधिक समय से ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने का कार्य कर रही हैं। विशेष रूप से नक्सल प्रभावित और दूरस्थ गांवों में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने, महिलाओं में स्वास्थ्य जागरूकता फैलाने तथा कन्या भ्रूण हत्या जैसी सामाजिक बुराइयों के खिलाफ अभियान चलाने में उनकी भूमिका उल्लेखनीय रही है। उन्होंने अनेक गांवों में जाकर गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच, टीकाकरण, पोषण संबंधी मार्गदर्शन और नवजात शिशुओं की देखभाल सुनिश्चित की।

दुर्गम क्षेत्रों में काम करना हमेशा आसान नहीं रहा, लेकिन उज्ज्वला सोयाम ने कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, संसाधनों की कमी और प्राकृतिक आपदाओं के दौरान भी अपने कर्तव्य को प्राथमिकता दी। कई बार खराब मौसम और सड़क सुविधाओं के अभाव के बावजूद उन्होंने समय पर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाकर गर्भवती महिलाओं और बच्चों की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। स्थानीय ग्रामीणों के बीच उनकी पहचान केवल एक नर्स के रूप में नहीं, बल्कि एक भरोसेमंद स्वास्थ्य साथी के रूप में बन चुकी है।

स्वास्थ्य सेवाओं में रचा इतिहास

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि उज्ज्वला सोयाम ने ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को सुरक्षित मातृत्व, परिवार नियोजन, एनीमिया नियंत्रण और स्वच्छता के प्रति जागरूक करने के लिए लगातार अभियान चलाए। उनके प्रयासों से कई गांवों में संस्थागत प्रसव की संख्या बढ़ी और मातृ मृत्यु दर में कमी लाने में मदद मिली। आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए उनका योगदान प्रेरणादायी माना जा रहा है।

इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस की थीम “हमारी नर्सें, हमारा भविष्य सक्षम नर्सें जीवन बचाती हैं” रखी गई थी। इसी थीम के अनुरूप उज्ज्वला सोयाम का कार्य नर्सिंग सेवा की संवेदनशीलता, समर्पण और मानवता का उत्कृष्ट उदाहरण माना जा रहा है। राष्ट्रीय फ्लोरेंस नाइटिंगेल पुरस्कार के अंतर्गत सम्मानित व्यक्तियों को पदक, प्रमाणपत्र, प्रशस्ति पत्र तथा एक लाख रुपये की नकद राशि प्रदान की जाती है।

चंद्रपुर जिले सहित पूरे महाराष्ट्र में उज्ज्वला सोयाम की इस उपलब्धि पर खुशी का माहौल है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों, सहकर्मियों और स्थानीय नागरिकों ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि उनका सम्मान राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं में कार्यरत हजारों नर्सों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा।

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