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तानाशाही की बना मिसाल…जिसके नाम से कांपती थी दुनिया, बर्बरता से लाखों जिंदगियां की तबाह
Adolf Hitler Birthday Special: दुनिया के सबसे निर्दयी तानाशाहों में गिने जाने वाले एडोल्फ हिटलर की मौत बेहद कायराना तरीके से हुई थी। 30 अप्रैल 1945 को, जब सोवियत सेनाओं ने बर्लिन को चारों ओर से घेर लिया था, तब..
- Written By: अमन उपाध्याय

एडोल्फ हिटलर, फोटो (सो, सोशल मीडिया)
नवभारत डेस्क: एडोल्फ हिटलर एक ऐसा नाम है जिससे अधिकतर लोग परिचित हैं। लेकिन यह कम ही लोग जानते हैं कि हिटलर कभी एक प्रसिद्ध कलाकार बनने का सपना देखा करते थे। दुर्भाग्यवश उनका यह सपना पूरा नहीं हो सका और उन्होंने एक अलग राह पकड़ ली। हिटलर का जन्म 20 अप्रैल 1889 को हुआ था। उन्होंने अपना कुछ समय वियना शहर में बिताया, जिसके बाद वे राजनीति की दुनिया में आए। धीरे-धीरे उन्होंने सत्ता पर पकड़ बना ली और अंततः जर्मनी के तानाशाह बन गए।
बता दें कि एडॉल्फ हिटलर का जन्म 20 अप्रैल, 1889 को ऑस्ट्रिया के ब्रौनौ एम इन नामक सीमावर्ती शहर में हुआ था। वर्ष 1898 में उनका परिवार लिंज़ नामक शहर, जो ऊपरी ऑस्ट्रिया की राजधानी में बस गया। हिटलर ने अपने करियर के रूप में दृश्य कला को अपनाने की इच्छा जताई, लेकिन उनके पिता चाहते थे कि वे हैब्सबर्ग साम्राज्य की सिविल सेवा में शामिल हों, जिससे दोनों के बीच काफी मतभेद हो गए।
प्रथम विश्व युद्ध के आरंभ के साथ जर्मन सेना में भर्ती
हिटलर 1908 से 1913 के बीच वियना में रहे, और इसके बाद वे म्यूनिख चले गए। इस समय के दौरान वे जलरंग और रेखाचित्र बनाकर अपना जीवन यापन करते थे। बाद में प्रथम विश्व युद्ध के आरंभ के साथ ही उन्होंने जर्मन सेना में भर्ती ले ली। युद्ध के दौरान उन्हें दो बार (1916 और 1918) चोटें आईं और उन्हें बहादुरी के लिए कई सैन्य पुरस्कार भी प्राप्त हुए।
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अक्टूबर 1918 में बेल्जियम के यप्रेस क्षेत्र में एक सरसों गैस हमले में उनकी आंखों की रोशनी आंशिक रूप से चली गई। इसके बाद उन्हें पासवॉक के एक सैन्य अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 11 नवंबर 1918 को उन्होंने युद्ध समाप्त होने की खबर सुनी। नवंबर 1918 में अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद, हिटलर म्यूनिख लौट आया।
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अक्टूबर 1919 में, हिटलर ने नाज़ी पार्टी में प्रवेश किया और 1920 में पार्टी के राजनीतिक कार्यक्रम के निर्माण में योगदान दिया। यह कार्यक्रम नस्लवादी विचारधारा, विस्तारवादी राष्ट्रीयता और अप्रवासी विरोधी मानसिकता पर आधारित था। 1921 तक, हिटलर नाज़ी पार्टी के पूर्ण नेता (Führer) बन गए।
नवंबर 1923 में हिटलर ने सरकार को अपदस्थ करने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उसे रोक लिया। इस संघर्ष में कई लोग मारे गए और हिटलर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। जुलाई 1925 में, जेल में रहते हुए हिटलर ने अपनी किताब “मीन काम्फ” लिखी, जिसमें उसने नस्लीय घृणा और तानाशाही के विचार व्यक्त किए।
60 लाख यहूदियों को मौत के घाट उतारा
साल 1933 में हिटलर ने जर्मनी की सत्ता संभाली और इसके साथ ही उसने एक नस्लवादी शासन की नींव रखी। हिटलर को यहूदियों से गहरी नफरत थी, और यही नफरत आगे चलकर एक भयानक त्रासदी में बदल गई। यहूदियों के खिलाफ उसकी नीतियों का चरम रूप “होलोकास्ट” था। एक ऐसा भयावह नरसंहार, जिसमें करीब छह वर्षों के भीतर लगभग 60 लाख यहूदियों को मौत के घाट उतार दिया गया। इनमें करीब 15 लाख मासूम बच्चे भी शामिल थे।
जर्मनी ने हिटलर के नेतृत्व में पोलैंड पर किया आक्रमण
द्वितीय विश्व युद्ध की शुरुआत 1 सितंबर 1939 को हुई, जब नाजी जर्मनी ने हिटलर के नेतृत्व में पोलैंड पर आक्रमण किया। हिटलर का उद्देश्य यूरोप में जर्मनी का प्रभुत्व स्थापित करना था और पोलैंड पर हमला इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था। इसके बाद, ब्रिटेन और फ्रांस ने जर्मनी के खिलाफ युद्ध की घोषणा की, जिससे द्वितीय विश्व युद्ध की शुरुआत हुई और इसका प्रभाव करोड़ों लोगों पर पड़ा।
खुद को गोली मारकर कर ली आत्महत्या
अप्रैल 1945 में जब जर्मनी के तानाशाह हिटलर को सोवियत सेनाओं ने बर्लिन में चारों ओर से घेर लिया था। पूरी दुनिया में मौत और विनाश का मंजर फैलाने वाला हिटलर अब अपनी हार से बुरी तरह टूट चुका था। वह बर्लिन के एक गहरे बंकर में अपनी प्रेमिका ईवा ब्राउन के साथ छिपा हुआ था, जो जमीन से 50 फीट नीचे स्थित था। 29 अप्रैल को उसने अपनी साथी ईवा ब्राउन से विवाह किया, जो कई वर्षों से उसके साथ थी। जब सोवियत सेना उसके बहुत करीब पहुंच गई, तो हिटलर अगले दिन, 30 अप्रैल 1945 को अपनी पत्नी ईवा ब्राउन के साथ बंकर में खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली।
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