
बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा (सोर्स-सोशल मीडिया)
Violence Against Hindus in Bangladesh: बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा की घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही हैं। ताजा घटना में नौगांव के रहने वाले मिथुन सरकार (25) को बेरहमी से डुबोकर मार दिया गया। यह हत्या कोई अकेली घटना नहीं है, बल्कि पिछले 20 दिनों में हुई यह 7वीं हत्या है, जो वहां के हिंदू समुदाय के सफाए के एक सुनियोजित अभियान की ओर इशारा करती है।
अल्पसंख्यक मंच के अनुसार, जैसे-जैसे संसदीय चुनाव नजदीक आ रहे हैं, हिंदुओं को निशाना बनाने की दर खतरनाक रूप से बढ़ गई है। अकेले दिसंबर महीने में हिंसा की कम से कम 51 घटनाएं दर्ज की गई हैं। इन घटनाओं में 10 हत्याएं, लूटपाट, आगजनी और धार्मिक ईशनिंदा के झूठे आरोपों में यातना देने जैसे गंभीर मामले शामिल हैं। स्रोतों के अनुसार, यह रणनीति साफ है, पहले डराओ, फिर मिटाओ और फिर चुप्पी साधे रहो।
जनवरी की शुरुआत से ही खौफ का यह सिलसिला जारी है। 2 जनवरी को सत्य रंजन दास, 3 जनवरी को खोकोन चंद्र दास, 4 जनवरी को शुभो पोद्दार और 5 जनवरी को राणा प्रताप बैरागी की हत्या कर दी गई। इनमें से खोकन चंद्र दास की हत्या की प्रकृति अत्यंत विचलित करने वाली थी, उन्हें काटकर आग के हवाले कर दिया गया था। इसके अतिरिक्त, संपत्तियों पर कब्जे और फसलों को आग लगाने की घटनाएं भी लगातार सामने आ रही हैं।
हिंसा का यह तांडव केवल हत्याओं तक सीमित नहीं है। 4 जनवरी को झेनैदाह में एक 40 वर्षीय हिंदू विधवा महिला के साथ सामूहिक बलात्कार की हृदयविदारक घटना सामने आई। उस महिला को एक पेड़ से बांध दिया गया, उसके सिर के बाल मुंडवा दिए गए और उसे अमानवीय यातनाएं दी गईं। इसी तरह, चटगांव और कोमिला में हिंदू परिवारों को बंधक बनाकर डकैती की गई और व्यापारियों की दुकानों से गहने लूट लिए गए।
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प्रशासन की चुप्पी पर सवाल अल्पसंख्यक मंच ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और मानवाधिकार संगठनों की चुप्पी पर कड़े सवाल उठाए हैं। वर्तमान प्रशासनिक व्यवस्था में हिंदुओं की सुरक्षा भगवान भरोसे नजर आ रही है। सूत्रों का कहना है कि अल्पसंख्यक समुदाय अब भारी अनिश्चितता और खौफ के साये में जीने को मजबूर है।






