पहले पीटा, फिर खिलाया जहर… बांग्लादेश में एक और हिंदू की हत्या, अल्पसंख्यकों में दहशत का माहौल
Bangladesh Hindu Killings: पड़ोसी देश बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की आग थमने का नाम नहीं ले रही है। ताजा घटना में सुनामगंज जिले के जॉय महापात्रो को निशाना बनाया गया।
- Written By: अमन उपाध्याय
बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Bangladesh Hindu Violence News In Hindi: बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा का सिलसिला लगातार भयावह रूप लेता जा रहा है। सुनामगंज जिले में एक और हिंदू व्यक्ति, जॉय महापात्रो की निर्मम हत्या ने वहां रह रहे अल्पसंख्यकों को झकझोर कर रख दिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, गुरुवार को महापात्रो को एक स्थानीय व्यक्ति ने बुरी तरह पीटा और उसके बाद उन्हें जबरन जहर खिला दिया गया।
उनके परिवार ने आरोप लगाया है कि इस हमले के बाद उनकी हालत बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें सिलहट एमएजी उस्मानी मेडिकल कॉलेज अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।
मोहम्मद यूनुस के कार्यकाल में बढ़ी हिंसा
बांग्लादेश में जब से मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार सत्ता में आई है, तब से हिंदू आबादी और अन्य अल्पसंख्यकों पर हमलों के मामलों में भारी वृद्धि देखी गई है। मानवाधिकार समूहों और स्थानीय समुदायों का कहना है कि प्रशासन की ढिलाई और अपराधियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई न होने के कारण कट्टरपंथियों के हौसले बुलंद हैं। ब्रिटिश सांसदों ने भी इन हत्याओं पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए इसे ‘अस्वीकार्य’ करार दिया है।
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हाल के महीनों में हुई अन्य दिल दहला देने वाली घटनाएं यह कोई इकलौती घटना नहीं है। पिछले कुछ हफ्तों में कई हिंदुओं को निशाना बनाया गया है-
जशोर: 5 जनवरी को हिंदू व्यापारी और पत्रकार राणा प्रताप की सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी गई।
नरसिंगदी: यहां एक 40 वर्षीय हिंदू व्यक्ति पर धारदार हथियारों से हमला कर उसे मौत के घाट उतार दिया गया।
मयमनसिंह: 18 दिसंबर को दीपू चंद्र दास पर ईशनिंदा का आरोप लगाकर उनकी पीट-पीटकर हत्या कर दी गई और फिर उनके शव को पेड़ से बांधकर जला दिया गया।
शरियतपुर: 31 दिसंबर 2025 को व्यापारी खोकन चंद्र दास को चाकू मारा गया और बाद में उन्हें जला दिया गया; ढाका में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
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न्याय की गुहार और बढ़ता आक्रोश
बांग्लादेश के अल्पसंख्यक अब सड़कों पर उतरकर सुरक्षा की मांग कर रहे हैं। मानवाधिकार संगठनों का मानना है कि स्थानीय अधिकारियों की कमजोर कार्रवाई अपराधियों को बढ़ावा दे रही है, जिससे कमजोर समुदाय खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं। हत्याओं का यह सिलसिला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बांग्लादेश की छवि को नुकसान पहुंचा रहा है।
